नई दिल्ली, जनतंत्र टुडे/ भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार पीएलआई स्कीम, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और स्किलिंग को प्राथमिकता दे रही है। यह बात भारी उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. हनीफ कुरैशी ने ऑटोमोटिव स्किल्स डेवलपमेंट काउंसिल (एएसडीसी) द्वारा आयोजित वार्षिक पाटर्नर्स फोरम 2025 में मुख्य अतिथि के रूप में कही। दिल्ली के द ग्रैंड होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में 250 से अधिक उद्योग प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े दिग्गज शामिल हुए। कार्यक्रम की थीम “Stronger Together, Transform Tomorrow” के जरिये सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के समन्वय से ऑटोमोबाइल क्षेत्र के भविष्य पर फोकस था।
विशिष्ट अतिथियों में प्रो. टी. जी. सीतारम, चेयरमैन, AICTE; डॉ. रोडनी रिविएर, क्लस्टर कोऑर्डिनेटर, GIZ इंडिया और डॉ. सुहास देशमुख, निदेशक, NCVET शामिल रहे। डॉ. कुरैशी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार 2070 तक नेट ज़ीरो का लक्ष्य लेकर चल रही है। ऑटो सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ₹26,000 करोड़ की पीएलआई योजना से इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन मोबिलिटी जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों को बढ़ावा मिल रहा है। अब तक 12 से अधिक कंपनियां 50% घरेलू मूल्य वर्धन का लक्ष्य हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि भारत के ऑटो कंपोनेंट्स के $700 बिलियन वैश्विक बाजार में केवल 3% हिस्सेदारी को बढ़ाने के लिए कौशल विकास की दिशा में काम करने की आवश्यकताहैं। एएसडीसी इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है, लेकिन हमें नवाचार आधारित स्किलिंग व री-स्किलिंग पर और अधिक फोकस करने की जरूरत है।
प्रो. टी. जी. सीताराम, चेयरमैन, AICTE ने कहा कि यह वह समय है जब हमें ‘विकसित भारत 2047’ के लिए नवाचार-आधारित, वैश्विक प्रतिस्पर्धी उत्पादों का निर्माण करना चाहिए। रोबोटिक्स और उभरती तकनीकों में कौशल प्रशिक्षण की भागीदारी को बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। मैं एएसडीसी को बधाई देता हूं, जो उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार कार्यबल तैयार कर रहा है और भारत को ऑटोमोटिव और ईवी क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जा रहा है।” नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (NCVET) के निदेशक डॉ. सुहास देशमुख ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि तकनीकी शिक्षा को अब उद्योग-केंद्रित और व्यवहारिक बनाया जा रहा है, जिससे युवाओं को जॉब के लिए तैयार किया जा सके।
कार्यक्रम के विशेष अतिथि GIZ इंडिया के डॉ. रॉडनी रिविएरे ने कहा कि बुनियादी तकनीकी कौशल अब भी जरूरी हैं, लेकिन वाहनों की तकनीक तेजी से बदल रही है। AI इंसानों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उन्हें सक्षम बनाएगा—चाहे वह प्रशिक्षण हो, डायग्नोस्टिक्स हो या लॉजिस्टिक्स। कार्यक्रम के दौरान एएसडीसी ने एचसीएल फाउंडेशन, विक्टोरा फाउंडेशन और हीरो मोटोकॉर्प – हरिद्वार, लुकास इंडियन सर्विसेज लिमिटेड के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। हीरोमोटो कॉर्प के सहयोग से चले प्रोजेक्ट सक्षम के तहत प्रशिक्षित महिला अभ्यर्थियों का दीक्षांत समारोह और सीएसआर पार्टनर्स का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में दो प्रमुख पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं।
