फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे
समग्र भलाई और आध्यात्मिक कल्याण केंद्र के अंतर्गत अग्रवाल कॉलेज बल्लभगढ़ द्वारा, प्राचार्य डॉ कृष्णकांत गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन में 22-25 फरवरी 2023 तक ‘जीवन जीने की राह‘ पर 4 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।
कार्यशाला की शुरुआत आज 22 फरवरी 2023 को उद्घाटन समारोह के साथ हुई, जिसमें डॉ विजाता आर्य (योग और प्राकृतिक चिकित्सा चिकित्सक, काया कल्प योग और नेचर क्योर इंस्टीट्यूट) मुख्य वक्ता रहीं। डॉ. विजाता आर्य अपने जीवन के शुरुआती दौर में ही प्राकृतिक चिकित्सा से परिचित हो गई थीं क्योंकि उनके पिता डॉ. बिजेंद्र आर्य प्राकृतिक चिकित्सा के विशेषज्ञ थे और उन्हें भीष्म पितामह पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसलिए उन्होंने जीवन में बहुत पहले ही सीखना शुरू कर दिया था। वह लंबे समय से लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रही हैं। उन्होंने योग में मास्टर्स किया है और साथ ही उन्होंने लेवल 1 और लेवल 2 आयुष सर्टिफिकेशन भी पूरा किया है। प्राकृतिक चिकित्सा और योग पर अपनी विशेषज्ञता के साथ, वह लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ स्वास्थ्य का प्रसार करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं और वह कायाकल्प के माध्यम से यही कर रही हैं।
वह इनफर्टिलिटी के इलाज में माहिर हैं। अपनी विशेषज्ञता से, उन्होंने कई लोगों को बांझपन से संबंधित जटिलताओं से छुटकारा पाने में मदद की है।उनके वक्तव्य का विषय था – प्राकृतिक चिकित्सा: संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए एक समग्र विज्ञान।
उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा पर विस्तार से बात की जो वैकल्पिक चिकित्सा का एक रूप है जो प्राकृतिक उपचार और शरीर की खुद को ठीक करने की क्षमता पर जोर देती है। उन्होंने आगे कहा कि प्राकृतिक चिकित्सक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और बीमारी को रोकने के लिए पोषण, हर्बल दवा, एक्यूप्रेशर, और जीवन शैली परामर्श सहित कई प्रकार के तौर-तरीकों का उपयोग करते हैं। उनका उद्देश्य पूरे व्यक्ति का इलाज करना, बीमारी के मूल कारण की पहचान करना और उसका इलाज करना है, और स्वास्थ्य और रोकथाम को बढ़ावा देना। प्राचार्य, डॉ कृष्णकांत ने अपने संबोधन में कहा कि रोगियों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे योग्य चिकित्सकों से देखभाल लें और प्राकृतिक चिकित्सा उपचार को पारंपरिक चिकित्सा देखभाल के विकल्प के बजाय पूरक के रूप में मानें। उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की कार्यशालाओं का उद्देश्य स्वस्थ रखने के लिए ज्ञान प्रदान करना है और साथ ही साथ कर्मचारियों व छात्रों को उनके जीवन में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मानसिक उपचार के लिए जागरुक करना है। मुख्य वक्ता, डॉ विजाता आर्य ने उपस्थित 115 प्रतिभागियों को व्यावहारिक अभ्यास दिया और उनके द्वारा उठाए गए प्रश्नों का उत्तर दिया।
इस कार्यशाला का आयोजन डॉ इनायत चौधरी एवं टीम के समस्त सदस्य, डॉ सारिका, डॉ डिंपल, श्रीमती पूजा, डॉ पूजा सैनी, डॉ विनीत नागपल द्वारा किया जा रहा है।
