
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार “आत्मनिर्भर भारत के लिए स्मार्ट एवं सस्टेनेबल कृषि: प्रौद्योगिकियां, नीतियां एवं प्रथाएं” का सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। सेमिनार में देशभर के प्रमुख वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं तथा छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
सेमिनार का मुख्य फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, रिमोट सेंसिंग और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों को कृषि के साथ एकीकृत करके स्थिरता, उत्पादकता और जलवायु अनुकूलन से संबंधित चुनौतियों का समाधान करने पर केंद्रित रहा।
दो दिनों के दौरान सेमिनार में स्टेट-ऑफ-द-आर्ट व्याख्यान, मुख्य व्याख्यान सत्र तथा अनेक तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें देश के विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागियों द्वारा लगभग 36 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इन शोध पत्रों में प्रिसीजन एग्रीकल्चर, एआई आधारित फसल पूर्वानुमान, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली, कृषि डेटा सुरक्षा और फार्मिंग के लिए नवीन संचार प्रौद्योगिकियां जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल थे। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. बबन कुमार एस. बंसोड़, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईओ चंडीगढ़ उपस्थित रहे।
अपने सन्देश में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने संबोधित करते हुए कृषि में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए अंतरानुशासनिक शोध की भूमिका पर जोर दिया।
दूसरे दिन डॉ. बिमल के. भट्टाचार्य, ग्रुप डायरेक्टर, स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर (इसरो), अहमदाबाद ने एक विचारोत्तेजक सत्र संबोधित किया। उन्होंने कृषि पूर्वानुमान, एग्रो-एडवाइजरी, फसल बीमा और प्रिसीजन फार्मिंग में अंतरिक्ष आधारित प्रौद्योगिकियों की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला।
समापन सत्र में सेमिनार के निष्कर्षों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि इस कार्यक्रम ने प्रौद्योगिकी को कृषि की वास्तविक चुनौतियों से जोड़ने का सफल मंच प्रदान किया। उन्होंने बल दिया कि शोध और क्षेत्रीय क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने के लिए ऐसे आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं।
सेमिनार चेयर प्रो. मुनीश वशिष्ठ ने संबोधन में कहा कि यह सेमिनार चर्चाओं से आगे बढ़कर अर्थपूर्ण अंतर्दृष्टि और सहयोग उत्पन्न करने में सफल रहा। उन्होंने कहा कि सतत कृषि के लिए निरंतर नवाचार और सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी है।
सेमिनार की संयोजक डॉ. मंजू कुमारी तथा सह-संयोजक डॉ. ललित राय के प्रयासों की सभी ने सराहना की। आयोजन टीम, शिक्षकों तथा छात्रों के समर्पण और समन्वय के लिए भी धन्यवाद दिया गया






