फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / हरियाणा में नवाचार और उद्यमिता का प्रमुख केंद्र बनने के दृष्टिगत जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद सफल इनक्यूबेटर्स के मानकों एवं फंडिंग मॉडल्स का अध्ययन कर रहा है तथा नई वित्तीय रणनीतियों की खोज कर रहा है। इस रणनीतिक कदम से विश्वविद्यालय के टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर को मजबूती मिलेगी, जिससे छात्र एवं पूर्व छात्र उद्यमियों को महत्वपूर्ण संसाधन, विशेषज्ञ मार्गदर्शन तथा अनुकूलित सीड फंडिंग उपलब्ध हो सकेगी ताकि वे प्रभावशाली उद्यमों को सफलतापूर्वक शुरू कर सकें और उन्हें स्केल कर सकें।
यह जानकारी विश्वविद्यालय के आईपीआर, इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन/स्टार्ट-अप डिवीजन की आठवीं बैठक में दी गई, जिसकी अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने की। बैठक में प्रतिष्ठित प्रतिभागियों में शिक्षा मंत्रालय के सहायक इनोवेशन डायरेक्टर श्री दीपन साहू, आईआईटी दिल्ली के मैनेजर-इनक्यूबेशन श्री अनमोल चतुर्वेदी तथा विश्वविद्यालय से प्रो. अतुल मिश्रा (डीन एकेडमिक अफेयर्स), प्रो. मनीषा गर्ग (डायरेक्टर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट), प्रो. मुनीश वशिष्ठ (डीन, इंस्टीट्यूशंस), प्रो. कोमल कुमार भाटिया (कंट्रोलर ऑफ फाइनेंस), प्रो. अनुराधा शर्मा तथा डॉ. राजीव कुमार साहा शामिल रहे।
बैठक का समन्वय प्रो. संजीव गोयल, इनचार्ज इनक्यूबेशन द्वारा किया गया। बैठक में छात्र एवं पूर्व छात्र-नेतृत्व वाले उद्यमों की इनोवेशन क्षमताओं को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न फंडिंग प्रस्तावों पर विचार-विमर्श हुआ। कमेटी ने कई आशाजनक उद्यमों की समीक्षा की, जिनमें एस्पिरेंट अड्डा (प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए प्लेटफॉर्म), यास्या बायोसाइंसेज प्राइवेट लिमिटेड, तथा छात्र-प्रेरित प्रोजेक्ट्स जैसे सुभ टेक्नोलॉजी (डिजिटल मार्केटिंग और वेब सॉल्यूशंस) तथा इनोवेटिव टाइम टेबल जेनरेशन सिस्टम शामिल हैं। नए आवेदकों जैसे द बूम बॉक्स क्लब, लोब्रा हंसेतु तथा अन्य पहलों के लिए इनक्यूबेशन अवसरों का मूल्यांकन भी किया गया, जिसमें इक्विटी मॉडल्स, संसाधन वितरण तथा दीर्घकालिक स्थिरता पर गहन चर्चा हुई।
शिक्षा मंत्रालय तथा आईआईटी दिल्ली के प्रतिनिधियों द्वारा साझा किए गए इनक्यूबेशन के सर्वोत्तम अभ्यासों तथा प्रभावी फंडिंग मॉडल्स का अध्ययन करते हुए रणनीतिक वार्तालाप हुई।
फ़िलहाल विश्वविद्यालय कमेटी सभी संबंधित हितधारकों के साथ सहयोग से मौजूदा स्टार्टअप को फंडिंग एवं सीड मनी प्रदान करने के लिए कार्य योजना को अंतिम रूप देने में सक्रिय है, जो विश्वविद्यालय की स्टार्टअप एंड सीड इन्वेस्टमेंट पॉलिसी के अनुरूप है। इस समय विश्वविद्यालय के इनक्यूबेटर 24 सक्रिय स्टार्टअप चल रहे हैं।
