फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / देश-विदेश में अपने शानदार, भावपूर्ण प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने वाली अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ओडिसी नृत्यांगना पौलमी गुहा ने सेक्टर 33 स्थित विद्युत मंत्रालय के राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थान (एनपीटीआई) में अपने पारंपरिक और अभिनय शैली से समां बांध दिया। “एक शाम-भारतीय संस्कृति के नाम“ सांस्कृतिक प्रस्तुति सभागार में आयोजित की गई। जिसमें एनपीटीआई के महानिदेशक और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के सदस्य (GO&D) हेमंत जैन के दिशा निर्देश पर चल रहे एनएचपीसी, ग्रिड इंडिया और पीएफसी के इंजीनियर ट्रेनी, ऑफिसर, ट्रेनी इंजीनियर सहित एमबीए और पीजीडीसी के सभी विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
सांस्कृतिक शाम कार्यक्रम डॉ. इंदु महेश्वरी प्रधान निदेशक (ट्रेनिंग), डॉ वत्सला शर्मा निदेशक (ट्रेनिंग) की देखरेख में आयोजित हुआ, जिसमें डिप्टी डायरेक्टर महेन्द्र सिंह, डिप्टी डायरेक्टर राहुल पांडे और असिस्टेंट डायरेक्टर अनुराग राय सहित अन्य सहयोगी उपस्थित रहे।
सांस्कृतिक परिवार से आने वाली पौलमी बचपन से ही नृत्य और संगीत की कला की ओर आकर्षित थीं और उन्होंने पाँच साल की छोटी उम्र में ही नृत्य की पहली शिक्षा ली। उन्होंने जाने-माने कोरियोग्राफर और कलाकार गुरु श्री वाल्मीकि बनर्जी के मार्गदर्शन में नृत्य के ओरिएंटल रूप में शुरुआती प्रशिक्षण प्राप्त किया। पौलमी ने अपनी माँ स्वगता गुहा, जो एक जानी-मानी गायिका और ऑल इंडिया रेडियो की ग्रेडेड कलाकार हैं, उनके कुशल मार्गदर्शन में हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन और रवींद्र संगीत में भी प्रशिक्षण लिया है। पौलमी अब करीब 30 से ज्यादा देशों में अपनी कला का लोहा मनवा चुकी हैं। उन्हें एक टेलीविज़न डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म, ’डांसेज़ ऑफ़ इंडिया’ में ओडिसी नृत्यांगना के रूप में भी दिखाया गया था, जिसका निर्देशन जाने-माने नृत्य विशेषज्ञों पद्म भूषण राजा और राधा रेड्डी ने किया था।
पिछले तीन दशकों से डांस जुड़ाव ने उन्हें बेहतरीन टीचिंग स्किल्स विकसित करने में मदद की है, जिससे वह युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा बन सकें। अपने परफॉर्मेंस और अपने लक्ष्य-आधारित वर्कशॉप और लेक्चर के माध्यम से, पौलमी ने भारतीय युवाओं के बीच सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए लगातार प्रयास किए हैं। एक त्रुटिहीन डांसर, कोरियोग्राफर, शास्त्रीय गायिका, रिसर्च स्कॉलर और एक समर्पित टीचर का एक दुर्लभ संयोजन, पौलमी का दृढ़ विश्वास है कि युवा दिमाग में हमारे मूल्यों को डालना ही हमारे अनमोल पारंपरिक संस्कृति को संरक्षित करने और एक बेहतर सांस्कृतिक भविष्य को आकार देने का एकमात्र तरीका है।
