फरीदाबाद, जनतंत्र टुडे/ आर्य समाज के महान् संन्यासी, समाजसुधारक, राष्ट्रभक्त एवं वैदिक पुनर्जागरण के अग्रदूत स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान दिवस के पावन अवसर पर डी.ए.वी. शताब्दी महाविद्यालय, फरीदाबाद के संस्कृत विभाग द्वारा एक वैदिक यज्ञ का श्रद्धापूर्वक आयोजन किया गया। इस यज्ञ का उद्देश्य स्वामी श्रद्धानंद जी के आदर्शों—वैदिक धर्म, सामाजिक समरसता, नारी शिक्षा, राष्ट्रसेवा एवं आत्मबलिदान—को स्मरण करते हुए विद्यार्थियों और प्राध्यापकों को उनके जीवन से प्रेरणा देना था।
कार्यक्रम में यजमान के रूप में कार्यकारी प्राचार्या डॉ. अंजू गुप्ता तथा अंग्रेज़ी विभाग की डॉ. वलेरिया सेठी उपस्थित रहीं। यज्ञब्रह्म के दायित्व का निर्वहन डॉ. अमित शर्मा, सहायकाचार्य, संस्कृत विभाग द्वारा किया गया। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ सम्पन्न कराया तथा यज्ञ के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला।
डॉ. अमित शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी का जीवन वेदों की ओर लौटो के उद्घोष का सजीव उदाहरण है। उन्होंने शिक्षा, शुद्धि आंदोलन, नारी उत्थान और राष्ट्रीय चेतना के क्षेत्र में जो कार्य किए, वे आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने बताया कि वैदिक यज्ञ केवल धार्मिक कर्मकाण्ड नहीं, बल्कि पर्यावरण शुद्धि, मानसिक शांति और नैतिक उत्थान का साधन है।
डॉ. अंजू गुप्ता ने स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान को राष्ट्र और समाज के लिए अमूल्य बताते हुए कहा कि उनका जीवन हमें सत्य, साहस और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। वहीं डॉ. वलेरिया सेठी ने यज्ञ के माध्यम से भारतीय संस्कृति और वैदिक मूल्यों से जुड़ने पर बल दिया तथा कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में नैतिक चेतना और सांस्कृतिक गौरव का बोध कराते हैं।
यज्ञ के दौरान शांति, समृद्धि, राष्ट्रकल्याण और विश्व-कल्याण की कामना से वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया। कार्यक्रम का वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी रहा। अंत में स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन एवं कृतित्व को नमन करते हुए उनके बलिदान से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर डॉ रुचि अरोड़ा, डॉ शिवानी, मैडम सुनीता डुडेजा, डॉ मीनाक्षी हुड्डा, मैडम ओमिता जौहर, प्रमोद कुमार, डॉ योगेश शर्मा, डॉ निशा सिंह, मैडम रचना कसाना, उमेश आदि प्राध्यापक, गैर शिक्षक कर्मचारी तथा विद्यार्थी भी उपस्तिथ रहे।
यह आयोजन महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक संस्कृति और राष्ट्रवादी मूल्यों के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास सिद्ध हुआ।
