फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे
देश के लोगों में आजादी की लौ जलाने वाले महान स्वतंत्रता सेनानियों में मंगल पांडेय का नाम काफी ऊपर आता है। देश आज उनकी 196वीं जन्म जयंती मना रहा है। अंग्रेजी फौज के सिपाही रहे मंगल पांडेय ने देश के लोगों में आजादी ऐसी अलख जगाई कि 90 साल बाद अंग्रेजी हुकूमत को देश छोडऩा पड़ा। 1857 के सिपाही विद्रोह को आजादी की पहली लड़ाई के रूप में जाना जाता है। इस लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाने वाले मंगल पांडेय को उनकी जयंती के मौके पर अखिल भारतीय ब्राह्मण सभा ने सैक्टर-12 फरीदाबाद स्थित कार्यालय पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर शत शत नमन कर याद किया। इस मौके पर पं सुरेन्द्र शर्मा बबली राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि मंगल पांडेय साहस और दृढ़ता का पर्याय हैं। उन्होंने इतिहास के बेहद महत्वपूर्ण समय में देशभक्ति की लौ जलाई। उन्होने कहा कि आजादी के दीवाने व भारत माता के सच्चे सपूत थे मंगल पाण्डे उन्होंने दासत्व स्वीकार नही किया और अंग्रेजी सेना में खुली बगावत शुरू कर दी और यह आग सुलगती गई, आज हम उनकी मेहरबानी से खुली हवा में सांस ले रहे हैं। इसी के साथ पं सुरेन्द्र शर्मा बबली ने बताया कि पानी पीने के मामले से फूटी थी विद्रोह की ज्वाला। उन्होने कहा कि अंग्रेजी शासन के दौरान भारतीय सैनिकों को काली पलटन कहा जाता था। मेरठ में भगवान शिव के औघडऩाथ मंदिर के पास छावनी थी। वहां काली पलटन रहा करती थी। इस कारण मंदिर का नाम काली पलटन मंदिर के नाम से भी जाना जाने लगा। उन्होने कहा कि अंग्रेजी शासन के दौरान भारतीय सैनिक औघडऩाथ मंदिर में पानी पीने आते थे। एक बार मंदिर के पुजारियों ने भारतीय सैनिकों को मंदिर परिसर के कुएं से पानी पीने से रोक दिया। सैनिकों ने कारण पूछा तो पुजारियों ने कहा कि वे जिन कारतूसों का इस्तेमाल करते हैं, उसमें गाय की चर्बी मिली होती है। इसी के बाद भारतीय सैनिकों में विद्रोह की ज्वाला भडक़ी और 1857 की क्रांति की शुरुआत हुई। उन्होने कहा कि महान स्वतंत्रता सेनानि मंगल पांडेय ने अनगिनत लोगों को प्रेरित किया था। इस अवसर पर पं हरीश पाराशर, एडवोकेट, पं कृष्ण पाराशर एडवोकेट, पं कर्ण पाराशर इंजिनियर, संजय, मोनू, रोहित, रामानुजन, श्रवण, शंकरलाल, रामजीलाल, गौरव, चिंटू एवं गोपाल सहित अन्य उपस्थित रहे।
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