
विश्वविद्यालय के नियमों और विनियमों पर आधारित पुस्तिका का विमोचन करते हुए कुलपति प्रो. सुशील कुमार तोमर। साथ में (दाई ओर) कार्यकारी परिषद् के सदस्य एवं गुरूग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार एवं अन्य
फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे
जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद ने आज विश्वविद्यालय के नियमों एवं विनियमों पर आधारित पुस्तिका का पहला संस्करण जारी किया, जिसे तीन खंडों में संकलित किया गया है। इस पुस्तिका को विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की 51वीं बैठक में प्रस्तुत किया गया, जो आज कुलपति प्रो. सुशील कुमार तोमर की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
इस आधिकारिक दस्तावेज में विश्वविद्यालय के अधिनियम, संविधि, अध्यादेश, नियम और विनियमन शामिल हैं, जिसमें समय के साथ किए गए सभी संशोधनों को भी शामिल गया हैं। इसमें विभिन्न प्रशासनिक, शैक्षणिक और अनुसंधान नीतियों के साथ-साथ छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों पर लागू होने वाले नियमों और विनियमों की रूपरेखा भी दी गई है।
विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से विश्वविद्यालय के विभिन्न नियमों और विनियमों से संबंधित विस्तृत पुस्तिका संकलित करने के लिए कार्यकारी परिषद के सदस्यों ने विश्वविद्यालय द्वारा की गई पहल की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान प्रो. तोमर ने पुस्तिका के महत्व पर बल देते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय के सभी हितधारकों के लिए एक मार्गदर्शिका के रूप में काम करेगी। उन्होंने विश्वविद्यालय के नियमों पर आधारित एक केंद्रीकृत संसाधन के रूप में पुस्तिका के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय की प्रशासन संरचना, परिचालन प्रक्रियाओं और इसके सदस्यों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को रेखांकित करती है। पुस्तिका का प्रकाशन प्रो. हरिओम की देखरेख में विश्वविद्यालय द्वारा गठित पांच सदस्यीय समिति द्वारा किया गया है।
कुलसचिव डॉ. मेहा शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय के नियमों और विनियमों पर आधारित इस पुस्तिका का प्रकाशन महत्वपूर्ण इसलिए भी है कि यह पारदर्शिता, जवाबदेही और इसके शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों के प्रावधान के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि पुस्तिका से प्रशासन के सुचारू संचालन में सुविधा होगा। इससे हितधारकों के बीच नियमों एवं विनियमों को लेकर समझ बढ़ेगी और शिक्षा एवं अनुसंधान में विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता के मानकों को बनाए रखने की मदद मिलेगी।







