
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / हरियाणा की पूर्व शिक्षा मंत्री एवं भाजपा हरियाणा की वरिष्ठ महिला नेता श्रीमती सीमा त्रिखा ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक का गिरना लोकतंत्र की दीवार पर पड़ा एक काला धब्बा बन गया है। सालों तक वादे किए गए, भाषण दिए गए और जब निर्णय का समय आया, तो कांग्रेस के सहयोगी दलों ने संसद को देश की आधी आबादी की आवाज के हक को दबाकर उनके रास्ते में दीवार बनकर खड़ा हो गया। जिससे विपक्षी संसद में महिला आरक्षण विधेयक का गिरना महिलाओं के अधिकारों की राजनैतिक भ्रूण हत्या: सीमा त्रिखाकांग्रेस सहित अन्य दलों का महिला विरोधी चेहरा सबके सामने आ गया है। पूर्व मंत्री सीमा त्रिखा ने कहा कि जब महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक अस्वीकृत हुआ, तब लोकसभा में कांग्रेस सहित विपक्ष की महिलाओं ने तालियां बजाकर महिलाओं के अधिकारों की राजनैतिक भ्रूण हत्या कर अपने हाथ लाल खून से रंगे है जिसे देश की महिलाएं कभी नहीं भला पाएंगी। उन्होंने इस बिल के गिरने पर तालियां बजाने पर गहरा दुख भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मन में पीड़ा अवश्य है, लेकिन हमारा संकल्प अडिग है। पिछले तीन दशकों से जो प्रयास जारी है, वह आगे भी निरंतर चलता रहेगा। क्योंकि महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के इस उद्देश्य से हम पीछे नहीं हटेंगे।
पूर्व मंत्री सीमा त्रिखा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि गरीब के बेटे ने जब देश के सर्वोच्च पद को संभाला तो उन्होंने अपनी मां के संघर्ष को याद करते हुए महिलाओं के हितार्थ अनेकों योजनाओं को लागू किया। इनमें उज्ज्वला योजना, मातृत्व योजना सहित अनेकों ऐसी योजनाओं को लागू किया जिससे देश में महिलाएं सशक्त हुई वहीं देश की संसद एवं विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का भी प्रण लिया।
इसके अलावा इंडिया का भारत बनाने के संकल्प के साथ कार्य किया जबकि देश की आजादी के बाद बने देश के पहले कांग्रेसी प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर 65 वर्षों तक देश की आधी आबादी के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने व्यंग कसते हुए कहा कि लगता है कि देश से अंग्रेज तो चले गए लेकिन आज भी देश में अंग्रेजी खून जिंदा है। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर हमलावर होते हुए कहा कि ऐसे दल महिलाओं को ताकत नहीं बल्कि प्रतीक बनाकर रखना चाहता है। लेकिन उन्हें याद रखना चाहिए कि जब अधिकार छीने जाते हैं, तो संघर्ष क्रांति बन जाता है। आज बिल गिरा है, कल कुर्सियां हिलेंगी। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी को उनका हक इसलिए नहीं मिल पाया, क्योंकि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इसके पक्ष में नहीं थे। साथ ही यह भी कहा गया कि देश की नारी शक्ति अपने साथ हुए इस कथित छल को कभी नहीं भूलेगी। क्योंकि इतिहास गवाह है कि शरी शक्ति है।
पूर्व मंत्री सीमा त्रिखा ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। यह केवल एक विधेयक का असफल होना नहीं, बल्कि उन करोड़ों महिलाओं की आशाओं और आकांक्षाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है, जिन्होंने अपने सशक्त भविष्य की कल्पना की थी। पूर्व में नारी स्वयंवरा होती थी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में फिर से नारी को शक्ति देने के लिए निर्णय लिया। मोदी जी के नेतृत्व में जहां एनडीए सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर प्रयासरत है, वहीं विपक्ष के इस रुख ने उनकी प्रगति में बाधा उत्पन्न की है। यह उनके सपनों और क्षमताओं के प्रति असम्मान को दर्शाता है। नारी शक्ति के इस अपमान का परिणाम विपक्ष को अवश्य भुगतना पड़ेगा। देश की महिलाएं इस अन्याय को विस्मृत नहीं होने देंगी और आने वाले समय में अपने मताधिकार के माध्यम से इसका स्पष्ट और करारा जवाब भी देंगी। क्योंकि लोकसभा में बिल नहीं पारित होने के बावजूद हमारा संकल्प और अधिक मज़बूत हुआ है। एनडीए सरकार नारी सम्मान और महिला सशक्तिकरण की लड़ाई आगे भी जारी रखेगी। क्योंकि महिलाओं को सशक्त बनाने, उन्हें संबल देने, उनका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और विधायी संस्थाओं में उनकी हिस्सेदारी स्थापित करने के लिए वर्षों से चला आ रहा संघर्ष और संकल्प आज भी अधूरा रह गया।




