फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / गणित एवं उभरती प्रौद्योगिकियों में अंतर-अनुशासनिक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद अगले शैक्षणिक सत्र से नया स्नातक कार्यक्रम – बी.टेक (मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटर साइंस) शुरू करेगा।
यह जानकारी कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने गणित विभाग द्वारा महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की 138वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित गणित महोत्सव-2026 में संबोधन के दौरान दी। स्नातकोत्तर गणित पाठ्यक्रमों में एडमिशन में निरंतर गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रो. राजीव कुमार ने स्नातक एवं स्नातकोत्तर दोनों स्तर के छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाले शोध में शामिल करने, प्रभावशाली शोध पत्र प्रकाशित करने पर बल देने तथा उद्योग की मांगों के अनुरूप शैक्षणिक कार्यक्रमों को तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि नया बी.टेक कार्यक्रम गणित के मूल सिद्धांतों को अत्याधुनिक कंप्यूटर साइंस अनुप्रयोगों से जोड़ेगा, जिससे छात्र डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिप्टोग्राफी एवं कम्प्यूटेशनल रिसर्च जैसे उभरते क्षेत्रों में करियर के लिए तैयार होंगे।
इस कार्यक्रम में विशेषज्ञ व्याख्यान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ एवं छात्र प्रतियोगिताएँ शामिल रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार द्वारा मुख्य अतिथि डॉ. बी.के. दास (सेवानिवृत्त प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय), विशिष्ट अतिथि प्रो. रश्मि भारद्वाज (गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली), विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. अनुराधा शर्मा, गणित विभागाध्यक्ष प्रो. नीतू गुप्ता एवं आरएंडडी निदेशक प्रो. मनीषा गर्ग की उपस्थिति में किया गया।
गणित विभागाध्यक्ष प्रो. नीतू गुप्ता ने बताया कि गणित केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने का शक्तिशाली साधन है। उन्होंने मैथ्स फेस्ट 2026 को छात्रों की विश्लेषणात्मक क्षमता के साथ-साथ रचनात्मकता एवं प्रस्तुति कौशल प्रदर्शित करने का मंच बताया, जिसमें तीन प्रतियोगिताएँ शामिल थीं—रंगोली (गणितीय समरूपता एवं पैटर्न की कला के माध्यम से उत्सव), पोस्टर मेकिंग (गणितीय अवधारणाओं का दृश्य चित्रण) एवं प्रमुख गणितज्ञों के जीवन एवं योगदान पर पीपीटी प्रस्तुति। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में 76 टीमों की उत्साही भागीदारी रही।
मुख्य अतिथि प्रो. बी.के. दास ने द्वितीय विश्व युद्ध की क्रिप्टोग्राफी से ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए गणित को “दिव्यता की भाषा” बताया, जो बाहरी पुरस्कारों के बजाय अपनी आंतरिक गरिमा पर फलता-फूलता है।
प्रो. रश्मि भारद्वाज ने आलू के चिप्स के उदाहरण से ग्रेडिएंट डिसेंट समझाया तथा भारतीय मंदिरों में परिलक्षित फ्रैक्टल ज्यामिति की सुंदरता पर प्रकाश डाला। उन्होंने अल्बर्ट आइंस्टीन के उद्धरण से समापन किया: “गणित संख्याओं के बारे में नहीं है। यह केवल समझने के बारे में है।” प्रो. अनु अग्रवाल ने मल्टी-क्राइटेरिया डिसीजन मेकिंग (एमसीडीएम) एवं इसके वास्तविक जीवन में उपयोग पर व्याख्यान दिया।
प्रतियोगिताओं में उत्साही भागीदारी देखी गई। पोस्टर मेकिंग में प्रथम स्थान केएल मेहता की सिया को, द्वितीय स्थान सरस्वती कॉलेज की समीक्षा तंवर एवं रिया बेनीवाल को, तथा तृतीय स्थान जेसी बोस विश्वविद्यालय की साक्षी पाठक एवं रेशमा को मिला। पीपीटी मेकिंग में प्रथम स्थान अरावली कॉलेज के निर्भय सिंह को, द्वितीय स्थान जेसी बोस विश्वविद्यालय की वर्षा मित्तल को, तथा तृतीय स्थान अग्रवाल कॉलेज की दिशा शर्मा एवं जेसी बोस विश्वविद्यालय की हिमांशी गोयल (संयुक्त) को प्राप्त हुआ। रंगोली में प्रथम स्थान जेसी बोस विश्वविद्यालय की सपना सिंगला एवं चेतना को, द्वितीय स्थान केएल मेहता की रूपांशी एवं जागृति को, तथा तृतीय स्थान जेसी बोस विश्वविद्यालय के चंदन प्रजापति एवं विदुषी को मिला।
