
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / नई दिल्ली :—- भारत मंडपम, दिल्ली में ‘सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन’ और ‘सनातन संस्था’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भव्य ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में प्राचीन भारतीय युद्धपरंपराओं तथा छत्रपति शिवाजी महाराज के युगीन शौर्य का अद्भुत, सजीव प्रदर्शन देखने को मिला। इस महोत्सव ने जनता में वीरता, राष्ट्रभक्ति और आत्मरक्षा की गहरी प्रेरणा जगाई।
महोत्सव में छत्रपति शिवाजी महाराज की शस्त्रकला का प्रभावशाली प्रदर्शन, मणिपुर की पारंपरिक थांग-ता (तलवार और भाला) युद्धकला का सजीव प्रस्तुतिकरण तथा हिंदू जनजागृति समिति द्वारा महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के प्रतिकार की व्यावहारिक झलकियां प्रस्तुत की गईं।
विशेष आकर्षण था अफजलखान वध का रोमांचकारी सजीव चित्रण! इस अवसर पर यह भी दिखाया गया कि वर्तमानकालीन दहशतवादी हमलों का मुकाबला शिवकालीन रणनीतियों को अपनाकर किस प्रकार किया जा सकता है। इस वीरतापूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों में उत्साह और गर्व की भावना प्रज्ज्वलित की।
कोल्हापुर स्थित ‘सव्यासाची गुरुकुलम’ की ओर से प्रस्तुत शौर्यप्रदर्शन में मराठी शस्त्रपरंपरा और शिवकालीन रणतंत्र का सशक्त संगम दिखाई दिया। युद्धकला के प्रयोग, आत्मरक्षा, महिलाओं के बचाव और सामूहिक आक्रमण में साहसपूर्वक प्रतिकार की सजीव झलकियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
साथ ही, ऋषि-मुनियों द्वारा बताए गए सूर्यनमस्कार, चंद्रनमस्कार, भूमिनमस्कार और पारंपरिक व्यायाम प्रस्तुत किए गए, जिन्होंने भारतीय संस्कृति में शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का गहन संदेश दिया।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी :—
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जो लोग कभी सनातन संस्कृति की आलोचना करते थे, वे आज उसके मूल्यों को अपना रहे हैं। लोग अब रासायनिक खेती के स्थान पर जैविक खेती अपना रहे हैं, चाय-कॉफी के स्थान पर ‘हर्बल टी’ की ओर रुख कर रहे हैं, और पहले जो एकेश्वरवाद की बात करते थे, वे अब अनेक देवताओं को मानने लगे हैं। 177 देशों ने संयुक्त राष्ट्र में भारत द्वारा प्रस्तावित ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के प्रस्ताव का समर्थन किया है। यूरोपीय देशों के लाखो नागरिक भी अब कुंभ मेले में सम्मिलित होने आने लगे हैं। यह परिवर्तन सनातन संस्कृति की वैश्विक स्वीकृति का द्योतक है। यह बदलाव बिना किसी पर आक्रमण किए स्वाभाविक रूप से हो रहा है, उन्होंने कहा। वे ‘सेव कल्चर सेव भारत फाउंडेशन’ और ‘सनातन संस्था’ द्वारा आयोजित ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में बोल रहे थे।
“‘गज़वा–ए–हिंद’ को वैचारिक उत्तर देना होगा” – कर्नल आर.एस.एन. सिंह
कार्यक्रम के ‘रणसंवाद – भारत की सामरिक नीति’ सत्र में ‘रॉ’ के पूर्व अधिकारी कर्नल आर.एस.एन. सिंह ने कहा कि ‘हमारे देश में एक अंदरूनी पाकिस्तान भी मौजूद है। हम पाकिस्तान के विरुद्ध ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी कार्रवाई कर सकते हैं, परंतु देश के भीतर के पाकिस्तान से कैसे निपटेंगे? आज राजनीति में सत्ता पाने का एक माध्यम अंदरूनी पाकिस्तान एवं देशद्रोहियों की मदद लेना बन गया है। अब ‘गज़वा-ए-हिंद’ के वैचारिक युद्ध का आरंभ करना आवश्यक है।’
विंग कमांडर विनायक डावरे ने कहा कि ‘1971 के युद्ध में 93,000 पाक सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया, परंतु हम ‘नैरेटिव की लड़ाई’ हार गए। भारत को अपनी सफलताओं का सही प्रचार कर देश की छवि मजबूत करनी होगी।’
ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) संजय अग्रवाल ने कहा, ‘भारत–चीन 1962 के युद्ध पर अक्सर चर्चा होती है, लेकिन 1967 के युद्ध में भारत ने चीन को पराजित किया था, यह भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। भारत अपनी शक्ति को पहचाने, इसके लिए ऐसे महोत्सवों की आवश्यकता है। देश को अपने लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए।’
‘यूथ फॉर पनून कश्मीर’ के अध्यक्ष श्री राहुल कौल ने कश्मीरी हिंदुओं के संघर्ष के बारे में बताते हुए कहा, ‘कश्मीरी हिंदुओं का नरसंहार हुआ, यह बात सरकारें आज भी मानने को तैयार नहीं हैं। पर्यटन से आतंकवाद रुक जाएगा, इस भ्रम में कोई न रहे। जगती, जम्मू में 16 जनवरी 2026 से एक विशेष अभियान शुरू कर रहे हैं। जम्मू–कश्मीर के हिंदुओं को देश के सभी हिंदुओं के सहयोग की आवश्यकता है।’
दूरदर्शन (डीडी) न्यूज़ के संपादक श्री अशोक श्रीवास्तव ने कहा, ‘जब कुछ राजनीतिक नेता हिंदुत्व को डेंगू, मलेरिया, एड्स कहते हैं, तब मीडिया चुप रहती है। वर्तमान में इस्लामोफोबिया की चर्चा हो रही है। वास्तव में हिंदूफोबिया बहुत बड़े स्तर पर है। हिंदूफोबिया पर एक रिपोर्ट है। भारत में दिसंबर 2025 के पहले 11 दिनों में केवल हिंदू होने के कारण हिंदुओं को परेशान किए जाने की 104 घटनाएँ हुई हैं।’
इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद सुधांशु त्रिवेदी, केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्रीपाद नाईक, प.पू. शांतिगिरी महाराज, पू. पवन सिन्हा गुरुजी, हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे, तथा सनातन संस्था की उत्तराधिकारी श्रीसत्शक्ति (सौ.) बिंदा सिंगबाळ और श्रीचित्शक्ति (सौ.) अंजली गाडगीळ सहित हजारों धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।




