फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सराय ख्वाजा फरीदाबाद में भारत के जनजातीय नायकों, उनकी संस्कृति एवं गौरव पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। भारत के जनजातीय नायकों, उनकी संस्कृति और योगदान का सम्मान करने वाला यह राष्ट्रीय उत्सव है, जिसका समापन 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में होता है।
जेआरसी और एस जे ए बी अधिकारी प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचंदा ने बताया कि यह दिवस भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है। जनजातीय गौरव वर्ष, जनजातीय कार्य मंत्रालय के नेतृत्व में मनाया जा रहा है। यह भगवान बिरसा मुंडा के 150 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है तथा वार्षिक जनजातीय गौरव दिवस को जनजातीय गर्व, समावेशन और विकास के लिये पूरे वर्ष चलने वाले आंदोलन में परिवर्तित करता है। यह पहल जन भागीदारी और संपूर्ण शासन दृष्टिकोण पर बल देती है तथा धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष ग्राम अभियान एवं प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान जैसी पहलों पर आधारित है। भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर, 1875 को छोटानागपुर क्षेत्र वर्तमान झारखंड में हुआ था। वे मुंडा जनजाति के एक महान जननायक थे।
ब्रिटिश नीतियाँ, जैसे स्थायी बंदोबस्त अधिनियम 1793 ने पारंपरिक खुंटकट्टी भूमि प्रणाली को नष्ट कर दिया था जिससे जनजातीय लोग बेगार, ऋण ग्रस्तता और विस्थापन के शिकार हो गए। बिरसा मुंडा ने वर्ष 1886 में ईसाई धर्म अपना लिया था लेकिन बाद में ब्रिटिश राज से इसके लिंक को देखते हुए उन्होंने इसे छोड़ दिया और कहा, साहेब साहेब एक टोपी। धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती हम सबके लिए गर्व और प्रेरणा का अवसर है। भगवान बिरसा मुंडा ने अपने अदम्य साहस, संघर्ष और त्याग से जनजातीय समाज को स्वाभिमान और स्वतंत्रता का संदेश दिया। जनजातीय गौरव पखवाड़ा न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत के उत्सव का प्रतीक है, बल्कि यह आदिवासी समाज के उत्थान, सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है।
प्राचार्य मनचंदा ने कहा कि पखवाड़े भर चलने वाला यह उत्सव, भारत के सबसे सम्मानित जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों में से एक और औपनिवेशिक उत्पीड़न के विरुद्ध प्रतिरोध के एक चिरस्थायी प्रतीक, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में वर्ष भर चलने वाले जनजातीय गौरव वर्ष का भाग है। भारत सरकार ने आदिवासी लोगों के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और उपलब्धियों को मनाने और स्मरण करने के लिए देश भर में कई कार्यक्रमों की योजना बनाई है। हिमालय से लेकर तटीय मैदानों तक, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने 15 नवंबर 2025 को जनजातीय गौरव दिवस तक, गौरव और स्मरण की साझा भावना को दर्शाते हुए सांस्कृतिक, शैक्षिक और समुदाय उन्मुख कार्यक्रमों की एक श्रृंखला प्रारंभ की है।
प्राचार्य मनचंदा ने पेंटिंग प्रतियोगिता तथा जनजातीय नायकों के कार्यक्रम आयोजित करने हेतु प्राध्यापिका गीता, दीपांजलि सहित सभी का हृदय से आभार व्यक्त किया।
