फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / लखनउ ;- उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और कृषि अर्थव्यवस्था को देश के बंदरगाहों से सीधे जोड़कर विकास की नई गति देने वाले डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। डीएफसीसीआईएल के प्रबंध निदेशक प्रवीण कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात कर उन्हें कॉफी टेबल बुक भेंट की। इसके साथ ही उन्हें प्रदेश में परियोजना की प्रगति और इसके दूरगामी लाभों से अवगत कराया। इस दौरान उन्होंने राज्य के किसानों, उद्यमियों और युवाओं की नई उम्मीदें के विषय में भी बताया।
राजभवन में हुई इस उच्च-स्तरीय बैठक में डीएफसीसीआईएल के सी जी एम/प्रयागराज ए.बी. सरन और जी जी एम/सुरक्षा, ईडीएफसी श्री आशीष मिश्रा भी मौजूद रहे। श्री प्रवीण कुमार ने राज्यपाल को प्रोजेक्ट की आकर्षक झलकियों से सुसज्जित कॉफी टेबल बुक भेंट किया। इसके साथ ही डीएफसीसीआई के महत्वाकांक्षी परियोजना के विषय में जानकारी दी। यह मुलाक़ात इस बात का संकेत है कि केंद्र की यह परियोजना राज्य सरकार के सहयोग से प्रदेश की तस्वीर बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है।
स्थानीय उद्योगों के लिए वरदान होगा
इससे सबसे अधिक लाभ कानपुर के चमड़ा उद्योग, अलीगढ़ के ताला उद्योग, फिरोजाबाद के कांच उद्योग और भदोही के कालीन उद्योग जैसे पारंपरिक औद्योगिक क्लस्टरों को लाभ मिलेगा। अभी तक इन उद्योगों को अपना माल बंदरगाहों तक भेजने में सड़क मार्ग का प्रयोग करना पड़ता था। इससे काफी समय लगता था, लेकिन इसके माध्यम से कम समय और सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जा सकता है।
“डीएफसी के पूरी तरह चालू होने से एक तिहाई समय पर पहुंच जाएगा। इससे न केवल हमारी लॉजिस्टिक लागत घटेगी, बल्कि हम वैश्विक बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।”
यह कॉरिडोर सिर्फ उद्योगों के लिए ही नहीं, बल्कि राज्य के करोड़ों किसानों के लिए भी समृद्धि के नए द्वार खोलेगा। ‘किसान रेल’ जैसी पहल के माध्यम से किसान अपने फल, सब्जी और अन्य कृषि उत्पादों को बिना खराब हुए सीधे मुंबई, कोलकाता और गुजरात के बड़े बाजारों तक भेज सकेंगे। इससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी।
प्रयागराज बना कंट्रोल सेंटर, युवाओं को रोजगार
इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण केंद्र प्रयागराज में स्थापित अत्याधुनिक ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर (ओसीसी) है, जो पूरे कॉरिडोर के लिए ‘नर्व सेंटर’ का काम कर रहा है। यह केंद्र स्थानीय प्रतिभाशाली युवाओं के लिए उच्च-तकनीकी रोजगार का एक बड़ा स्रोत बनकर उभरा है। इसके अलावा, कॉरिडोर के किनारे बन रहे लॉजिस्टिक्स हब, औद्योगिक क्लस्टर एवं रोजगार के अवसरों के विकास से संतुलित क्षेत्रीय विकास से संतुलित क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भारत के परिवहन अवसंरचना में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह प्रणाली न केवल लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाएगी, बल्कि औद्योगिक विकास को गति देगी और सतत परिवहन को भी प्रोत्साहित करेगी।
लॉजिस्टिक्स लागत कम करने, गति और विश्वसनीयता बढ़ाने तथा हरित अर्थव्यवस्था में योगदान देने के माध्यम से, DFC भारत की विकसित भारत 2047 (Visits Bharat 2047) की परिकल्पना में एक प्रमुख साधन के रूप में उभर रहा है।
प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान और विकसित भारत@2047 के लक्ष्य के अनुरूप, DFC कॉरिडोर विश्वस्तरीय लॉजिस्टिक्स अवसंरचना प्राप्त करने और भारत को वैश्विक आर्थिक नेतृत्व की दिशा में अग्रसर करने में उत्प्रेरक सिद्ध होंगे।
