
फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे/ डीएवी शताब्दी महाविद्यालय में आर्य समाज की 150वें स्थापना दिवस पर “स्वामी दयानंद सरस्वती का वैदिक दर्शन” विषय को लेकर आयोजित संगोष्ठी के प्रथम दिवस पर देश-विदेश के विश्वविद्यालयों, शिक्षण-शोध संस्थानों के विशेषज्ञ, शिक्षाविद, शोधार्थी व छात्रों ने हाइब्रिड मोड़ में अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किये | महाविद्यालय के कार्यकारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र कुमार ने कार्यक्रम के प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. वीरेंद्र अलंकार, निदेशक, महर्षि दयानंद पीठ, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़; मुख्य वक्ता प्रो. सुरेंद्र कुमार, निदेशक, महर्षि दयानंद पीठ, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक व शोधार्थियों का यज्ञशाला में हावनाहुति दौरान व सभागार में स्वागत किया | प्राचार्य ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक प्रासंगिकता तथा स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा प्रतिपादित वैदिक दर्शन को समकालीन संदर्भों में पुनः स्थापित करने की जरूरत को समझाया | डीएवी कॉलेज प्रबंधकर्तृ समिति ,नई दिल्ली के उपाध्यक्ष, प्रो. डॉ. एस. के. सोपोरी ने अपने शुभकामना संदेश के साथ वैदिक विचारधारा के महत्त्व को रेखांकित किया |
मुख्य अतिथि प्रो. वीरेंद्र अलंकार ने दयानंद जी के वैदिक चिंतन को तार्किक बताते हुए समझाया कि तर्क की कसौटी पर खरा उतरने वाला ही वास्तिविक ज्ञान है | स्वामी जी ने वेदों पर भाष्य लिखने से पहले उनको लेकर उद्वेलित प्रश्नों के तार्किक उत्तर मिलने तक सही नहीं माना | दुःख अपूर्णता से होता है और ज्ञान हमें पूर्णता की ओर ले जाता है, तब जाकर हमें सत्त, चित्त व आनंद की प्राप्ति होती है | उन्होंने बताया कि जिस धर्म में कानून का पालन, निष्पक्षता, व सत्य होगा, वही असली धर्म होगा |
मुख्य वक्ता प्रो. सुरेंद्र कुमार ने स्वामी जी की कठिनाइयों के साथ शुरू हुई जीवन यात्रा में सत्य की खोज, गिरिजानंद जी से दीक्षा, अलौकिक व्यक्तित्व धारण, जनजागरण, वेद भाष्यों की रचना, सत्यार्थ प्रकाश सहित 20 पुस्तकों का स्वयं लेखन, संध्या पद्धति, वैदिक दर्शन के साथ-साथ शैक्षिक दर्शन, सामाजिक दर्शन जैसे विषयों को विस्तार से समझाया |
द्वितीय सत्र में डीएवी कॉलेज प्रबंधकर्तृ समिति ,नई दिल्ली के प्रकाशन विभाग, निदेशक, प्रो एस. के. शर्मा जी ने बताया कि यह बड़े ही गर्व की बात है कि डीएवी शिक्षण संस्थान की बागडोर सँभालने वाले पदमश्री डॉ. पूनम सूरी के पूर्वजों ने स्वामी दयानंद से दीक्षा ली और आज उनके द्वारा स्वामी जी के वैदिक दर्शन को डीएवी शिक्षण संस्थानों के माध्यम से युवा पीढ़ी में समावेशित भी किया जा रहा है |
पदमश्री प्रो सुकामा आचार्या ने कहा कि महर्षि दयानंद के वैदिक दर्शन को एक महर्षि बनकर ही समझा जा सकता है | उन्होंने वेदों में निहित दर्शन को चिंतन के जरिये समझने पर बल दिया और बताया कि चंतन के जरिये ही आप उस दिव्य प्रकाश को अपने चारों तरफ महसूस कर पाएंगे | स्वामी जी का वैदिक दर्शन अनुपम है, मौलिक है, अलौकिक है | महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से ऑनलाइन जुडी प्रो. सुनीता सैनी ने कहा कि आध्यात्मिक चिंतन को वैदिक चिंतन से सुलझाने का प्रयास किया जा सकता है | उन्होंने प्रकृति चिंतन में परमात्मा द्वारा सृष्टि के निर्माण, संचालन को विस्तार से समझाया |
नोएडा में कार्यरत रहे पूर्व आईपीएस प्रो आनंद कुमार ने बताया कि स्वामी जी का वैदिक दर्शन और चिंतन विश्व के अन्य धर्मो के दर्शन चिंतन से तर्क के आधार पर अलग है | अन्य किसी भी धर्म में लिखी बातें तर्क की कसौटी पर खरी नहीं उतरती, ना ही वहां प्रश्न करने की स्वतंत्रता है, बल्कि बिना तर्क के धर्म ग्रंथों को मानने की बाध्यता है | न्यूयॉर्क, यूएसए से जुड़े अमरजीत आर्य ने बताया की मनुष्य को कर्म करने में स्वतंत्रता है, जबकि कर्मफल को ढ़ोने में परतंत्रता है | उन्होंने बताया कि मनुष्य और पशु में चिंतन का फर्क है और यही चिंतन हमें अपने कर्मों को लेकर करना चाहिए |
इस संगोष्ठी में भारत के लगभग 22 राज्यों के 130 प्रतिभागियों ने पंजीकरण किया है। प्रथम दिवस दो ऑनलाइन सत्रों तथा एक ऑफलाइन सत्र में लगभग 50 प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किये। इन सत्रों के सत्राध्यक्षों में डॉ सुषमा अलंकार, डी ए वी कॉलेज, सेक्टर 10 ,चंडीगढ़, डॉ देवी सिंह, जी जी एस डी कॉलेज, सेक्टर 32 चंडीगढ़, तथा डॉ सत्यप्रिय आर्य , संस्कृत विभाग जम्मू विश्वविद्यालय, जम्मू रहे।संगोष्ठी व महाविद्यालय आर्य समाज इकाई सचिव डॉ. अर्चना सिंघल ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, शोधार्थियों व छात्रों का स्वामी जी को लेकर बेहतर विचार विमर्श, शोधपत्र प्रस्तुतीकरण व भविष्य की युवा पीढ़ी और समाज के मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद किया | संयोजक डॉ. अमित शर्मा की कृति ‘शब्द संवाद’ पुस्तक का विमोचन भी इस अवसर पर विशिष्टजनों द्वारा किया गया और कार्यक्रम संयोजन व पुस्तक रचना के लिए बधाई दी |







