
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / जेसी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद द्वारा ‘विकसित भारत के लिए सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने’ पर केन्द्रित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में प्रमुख वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत से विशेषज्ञों ने सामग्री विज्ञान, पर्यावरण जैव प्रौद्योगिकी और ऊर्जा समाधानों में सतत प्रथाओं पर चर्चा की। यह कार्यक्रम केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पर्स कार्यक्रम के तहत प्रायोजित था।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में डॉ. एसके चतुर्वेदी, संयुक्त निदेशक, राष्ट्रीय सीमेंट और निर्माण सामग्री परिषद मुख्य अतिथि रहे। सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. एस.के. तोमर ने की। अपने संबोधन में कुलपति प्रो. तोमर ने वास्तविक जीवन की चुनौतियों के लिए शोध-संचालित समाधानों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं को नवीन विचार विकसित करने और स्वच्छ, हरित और तकनीकी रूप से उन्नत भारत की दिशा में योगदान करने के लिए प्रोत्साहित किया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि डॉ. एस.के. चतुर्वेदी ने औद्योगिक स्थिरता के लिए कार्बन कैप्चर और भंडारण को एक महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम के अन्य सत्रों में सीएसआईआर-सीएसएमसीआरआई, भावनगर से प्रो. अरविंद कुमार ने समुद्री रसायनों, आयनिक तरल पदार्थों और सर्फेक्टेंट में प्रगति प्रस्तुत की। आईआईटी खड़गपुर से प्रोफेसर ताराशंकर पाल ने नैनोमटेरियल और मैटेरियल साइंस के अंतर्गत सतत प्रथाओं की जानकारी दी। आईआईटी खड़गपुर से प्रो. अंजलि पाल ने प्रदूषण नियंत्रण और जल उपचार के अभिनव तरीकों पर चर्चा की। सीएसआईआर-नीरी से मुख्य वैज्ञानिक और निदेशक डॉ. एस.के. गोयल ने अपशिष्ट उपयोग और मिशन लाइफ पहल के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने पर बल दिया। पंजाब विश्वविद्यालय से प्रो. सुखबीर कौर ने उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों को नियंत्रित करने के लिए एकीकृत वैकल्पिक उपचारों पर एक व्यावहारिक चर्चा प्रदान की।
संगोष्ठी में 140 से अधिक पंजीकरण हुए, जिसमें युवा शोधकर्ताओं की ओर से लगभग 20 शोध मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतियां दीं गईं। चयन के उपरांत 10 युवा शोधकर्ताओं को तकनीकी सत्र में अपना काम प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। जैव प्रौद्योगिकी हस्तक्षेप, स्वच्छ ऊर्जा समाधान और पर्यावरण मॉडलिंग को कवर करने वाले उनके शोध ने सतत लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से वैज्ञानिक जांच की अगली पीढ़ी को प्रदर्शित किया। संगोष्ठी का संयोजन डॉ. रवि कुमार की देखरेख में सह-संयोजकों डॉ. सूरज गोयल, डॉ. सोमवीर बजाड़ और डॉ. दीपांशु शर्मा द्वारा किया गया।





