फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / CRE (Continuing Rehabilitation Education) ( सतत पुनर्वास शिक्षा कार्यक्रम ) अधिगम अक्षमता प्रबंधन पर केंद्रित दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जो ज्ञान और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है। दीप प्रज्वलन का यह पावन कार्य मुख्य अतिथि मुकेश गुप्ता (चेयरमैन), डॉ. एसपी सिंह (प्राचार्य), और प्रबंधन समिति के अन्य सम्मानित सदस्यों की उपस्थिति में संपन्न हुआ
डॉ. विजय भारती ने बताया कि “सीखने की अक्षमता किसी व्यक्ति की सूचना को संसाधित करने, समझने या उपयोग करने की क्षमता को प्रभावित करती है। यह पढ़ाई, लेखन, गणित, तर्क और सामाजिक कौशल पर अलग-अलग तरीकों से प्रभाव डालती है।”
सुश्री आशा रानी ने ध्यान, धारणा, स्मृति, सोच, भावनाओं, मोटर स्किल्स और सूचना प्रसंस्करण में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की, जो विशेष रूप से सीखने में कठिनाई वाले बच्चों को प्रभावित करती हैं।
सुश्री आयुषी पाटियाल ने पढ़ाई से जुड़ी कठिनाइयों जैसे कि शब्दों की पहचान (डिकोडिंग), प्रवाह, समझ, आकलन, फोनेटिक्स, हस्तक्षेप रणनीतियाँ, व्यक्तिगत सहायता और प्रगति निगरानी पर प्रकाश डाला।
सुश्री अपूर्वा अमित देसाई ने लेखन संबंधित समस्याओं जैसे वर्तनी, व्याकरण, संगठन, प्रवाह, आकलन, सहायता तकनीक, संरचित सहायता और आत्म-नियंत्रण पर विचार साझा किए।
क्वाज़ी फरहाना इस्लाम ने DTLD आकलन उपकरण की उपयोगिता पर चर्चा की, जो संज्ञानात्मक, व्यवहारिक और शैक्षणिक चुनौतियों का मूल्यांकन कर सीखने की अक्षमता की पहचान करने में सहायक होता है। उन्होंने बताया कि यह उपकरण शिक्षकों और पेशेवरों को व्यक्तिगत हस्तक्षेप रणनीतियाँ तैयार करने में मदद करता है। हालाँकि, इसके प्रभावी उपयोग के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।
डॉ. कुसुम गुप्ता ने बहू-संवेदी शिक्षण, दृश्य सहायता और स्क्रैफोल्डिंग जैसी रणनीतियों पर जोर दिया, जो विशेष रूप से सीखने में कठिनाई वाले छात्रों के लिए गणितीय समझ और समस्या समाधान कौशल को मजबूत करती हैं।
प्रदीप कुमार के अनुसार विशिष्ट अधिगम अक्षमता (SLD) वाले छात्रों के लिए पाठ्यक्रम अनुकूलन में विषयवस्तु, शिक्षण विधियों, मूल्यांकन और शिक्षण वातावरण में बदलाव शामिल है ताकि उनकी विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। प्रदीप कुमार के अनुसार, इसमें सरल निर्देश, बहु-संवेदी शिक्षण, अतिरिक्त समय, सहायक तकनीक और व्यक्तिगत सहायता जैसी रणनीतियाँ अपनाई जाती हैं, जिससे शिक्षा अधिक सुलभ, रोचक और प्रभावी बन सके, साथ ही आवश्यक शिक्षण लक्ष्यों को बनाए रखा जा सके।
विजन इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड स्ट्डीज फरीदाबाद की ओर से डॉक्टर नमिता शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा, “यह सेमिनार विशेष रूप से सीखने की अक्षमता से प्रभावित बच्चों और उनके शिक्षकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ। विषय विशेषज्ञों ने अपनी बहुमूल्य जानकारी और अनुभव साझा किए, जिससे उपस्थित सभी प्रतिभागियों को इस विषय को बेहतर समझने में मदद मिली।
संस्थान ने सभी शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और अभिभावकों के उत्साहजनक सहभागिता की सराहना की और भविष्य में भी इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता जताई। सेमिनार के समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस आयोजन ने शिक्षकों और विशेषज्ञों को अधिगम अक्षमता प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने और प्रभावी रणनीतियाँ अपनाने की दिशा में प्रेरित किया।
