
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / अग्रवाल महाविद्यालय, बल्लभगढ़ के बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) प्रकोष्ठ द्वारा 30 मार्च 2026 को “पेटेंट दाखिल करने की प्रक्रिया: एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका” विषय पर एक ऑनलाइन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री देवेंद्र कुमार गुप्ता, महासचिव श्री दिनेश कुमार गुप्ता तथा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजीव कुमार गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। उनके निरंतर सहयोग और प्रेरणा ने इस कार्यशाला की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. राम चंदर, पुस्तकालयाध्यक्ष थे, जिन्होंने अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं रोचक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने पेटेंट दाखिल करने की पूरी प्रक्रिया को सरल, स्पष्ट और व्यावहारिक तरीके से समझाया। उन्होंने वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व पर प्रकाश डाला तथा यह बताया कि किस प्रकार नवाचारों को पेटेंट के माध्यम से सुरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने पेटेंट दाखिल करने के दौरान होने वाली सामान्य त्रुटियों पर भी विस्तार से चर्चा की तथा उनसे बचने के उपाय बताए।
सत्र को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए उन्होंने वास्तविक जीवन से जुड़े उदाहरण एवं अध्ययन प्रकरण (केस स्टडी) भी प्रस्तुत किए। वक्ता ने विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों को नवाचारी सोच विकसित करने तथा अपने विचारों को विधिक रूप से सुरक्षित करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही, उन्होंने प्रतिभागियों को अनुसंधान कार्यों में सक्रिय भागीदारी करने तथा नवाचार एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में योगदान देने के लिए भी उत्साहित किया।
इस कार्यक्रम का संयोजन आईपीआर प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ. राम चंदर द्वारा किया गया तथा समन्वयन वाणिज्य विभाग की सहायक प्राध्यापिका श्रीमती पूजा द्वारा किया गया। इस कार्यशाला में लगभग 60 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और बौद्धिक संपदा अधिकारों तथा पेटेंट प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
यह कार्यशाला अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुई, जिसने प्रतिभागियों को नवाचार करने और अपने विचारों को उचित विधिक माध्यमों से सुरक्षित करने के लिए प्रेरित किया। महाविद्यालय भविष्य में भी इस प्रकार की शैक्षणिक एवं शोध-उन्मुख गतिविधियों का आयोजन करता रहेगा, जिससे विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों के समग्र विकास को प्रोत्साहन मिल सके।