
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन और नगर निगम फरीदाबाद द्वारा संयुक्त रूप से चलाए जा रहे विशेष स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण अभियान के अंतर्गत मंदिरों से निकलने वाले फूलों के कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है।
16 फरवरी से 30 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार लगभग 7 टन फूलों का कचरा विभिन्न धार्मिक स्थलों से एकत्रित किया गया, जबकि यह अभियान वर्तमान में भी नियमित रूप से जारी है। इस पहल का उद्देश्य धार्मिक स्थलों से निकलने वाले जैविक अपशिष्ट का पर्यावरण अनुकूल तरीके से निस्तारण कर “कचरे से संपदा” एवं “जीरो वेस्ट प्रबंधन” मॉडल को बढ़ावा देना है।
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शहर के 15 बड़े मंदिरों को चिन्हित किया गया, जहां विशेष रूप से खाली ड्रम स्थापित किए गए। इन ड्रमों में मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों को एकत्रित किया जाता रहा, जिन्हें नियमित रूप से विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन की टीम द्वारा संग्रहित किया गया।
एकत्रित फूलों एवं अन्य सामग्री को टीम द्वारा अलग-अलग किया गया। चयनित फूलों को स्वच्छ तरीके से साफ कर सुखाया गया, जिनका उपयोग प्राकृतिक धूप, हवन सामग्री एवं अन्य पर्यावरण अनुकूल उत्पाद तैयार करने में किया जाएगा। वहीं शेष जैविक अवशेषों को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस कर जैविक खाद में परिवर्तित किया जा रहा है। फूलों के उपयोग के बाद बचने वाले हिस्से और अन्य सामग्री को भी व्यर्थ न जाने देने के उद्देश्य से “जीरो वेस्ट प्रबंधन” मॉडल पर कार्य किया जा रहा है। इसके तहत जेसीबी मशीन की सहायता से विशेष कम्पोस्टिंग गड्ढे तैयार किए गए हैं, जिनमें फूलों के कचरे एवं अन्य जैविक अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर जैविक खाद बनाई जा रही है। साथ ही आधुनिक एरोबिन्स भी स्थापित किए गए हैं, जिनकी सहायता से जैविक कचरे का व्यवस्थित एवं तीव्र गति से प्रबंधन किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह लगभग 7 टन जैविक फूल कचरा सामान्य डंपिंग ग्राउंड में फेंक दिया जाता, तो इसके सड़ने से लगभग 230 से 250 किलोग्राम मीथेन गैस उत्पन्न हो सकती थी। मीथेन एक अत्यंत हानिकारक ग्रीनहाउस गैस है, जिसका प्रभाव कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में लगभग 28 गुना अधिक माना जाता है। इस प्रकार यह उत्सर्जन लगभग 6.5 से 7 टन कार्बन डाइऑक्साइड समकक्ष पर्यावरणीय प्रभाव उत्पन्न कर सकता था।
इस अभियान के माध्यम से न केवल शहर में स्वच्छता को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि मीथेन एवं कार्बन उत्सर्जन को कम करने तथा “कचरे से संपदा” की सोच को भी मजबूती मिल रही है।
विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन के प्रेसिडेंट सरदार एस. एस. बांगा ने कहा कि धार्मिक स्थलों से निकलने वाले फूलों के कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन समय की आवश्यकता है। यह पहल केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास को जनआंदोलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि एरोबिन्स एवं जीरो वेस्ट प्रबंधन मॉडल आने वाले समय में शहरों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण सिद्ध होंगे। वहीं नगर निगम फरीदाबाद आयुक्त धीरेन्द्र खड़गटा ने कहा कि स्वच्छ एवं हरित फरीदाबाद के लक्ष्य को लेकर निगम लगातार कार्य कर रहा है। विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन के सहयोग से शुरू की गई यह पहल धार्मिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन का एक उत्कृष्ट मॉडल बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।





