फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / डीएवी शताब्दी महाविद्यालय में 20–21 फरवरी 2026 को “कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं पुस्तकालयों तथा शैक्षणिक संस्थानों में नवाचारपूर्ण सेवाएँ” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जायेगा | हाइब्रिड मोड यानि ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों ही तरीके से आयोजित यह सेमिनार ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ,भारत सरकार (डीआरडीओ) द्वारा प्रायोजित है। यह बहु-विषयक सम्मेलन महाविद्यालय के आईक्यूएसी के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में कुल आठ तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पुस्तकालय सेवाएँ, सूचना प्रबंधन, नवाचारपूर्ण तकनीकी समाधान तथा ज्ञान समाज के निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा होगी। देश-विदेश से सौ से अधिक शोधार्थियों, शिक्षाविदों, पुस्तकालय पेशेवरों एवं अन्य विशेषज्ञों के भाग लेने की संभावना है।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र कुमार सम्मेलन के अध्यक्ष होंगे। संयोजक मंडल में डॉ. अर्चना सिंघल, डॉ. जितेंद्र ढुल एवं सुश्री रितु शामिल हैं। आयोजन सचिव के रूप में डॉ. बिंदु रॉय, डॉ. धर्मवीर सिंह, सुश्री तनुजा गर्ग, श्री नेत्रपाल सैन एवं सुश्री शिल्पी गोयल कार्यभार संभाल रहे हैं। आयोजन टीम में डॉ. अंजुषा श्रीवास्तव सहित अन्य सदस्य सक्रिय रूप से तैयारियों में जुटे हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान प्राचार्य डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि सम्मेलन के पहले दिन मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. ज्योति राणा, (कुलसचिव,श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय,पलवल) होंगी, जबकि विशिष्ट अतिथि डॉ. संजीव कुमार, (प्राचार्य, अग्रवाल महाविद्यालय) रहेंगे। दूसरे दिन मुख्य के अतिथि डॉ. कृष्ण कांत गुप्ता, (कुलसचिव, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय )होंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन,भारत सरकार (डीआरडीओ) के डॉ. के.पी. सिंह एवं महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक की प्रो. डॉ. लक्ष्मी गुप्ता उपस्थित रहेंगी। सम्मेलन को डीआरडीओ का प्रायोजन प्राप्त है। उत्कृष्ट शोध पत्र, श्रेष्ठ शोध प्रस्तोता तथा श्रेष्ठ एलआईएस प्रोफेशनल को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। ऑनलाइन पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 फरवरी 2026 थी, जबकि ऑफलाइन पंजीकरण सम्मेलन के दिन भी किया जा सकेगा।
आयोजकों ने बताया कि यह सम्मेलन पुस्तकालयों और शैक्षणिक संस्थानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने तथा नवाचारपूर्ण सेवाओं के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। इस विषय में ज्यादा जानकरी व मदद हासिल करने के लिए सहायक प्राध्यापकों डॉ. धर्मवीर सिंह संपर्क कर सकते हैं।
