फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / एनआईटी तीन स्थित डीएवी शताब्दी महाविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर एक एक्सटेंशन लेक्चर का आयोजन किया गया | लेक्चर का विषय “सतत राष्ट्र निर्माण में सामुदायिक रेडियो की भूमिका” रहा। मुख्य वक्ता के रूप में मानव रचना विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो स्टेशन के साथ 15 वर्षों से भी लंबे समय से जुडी, अनुभवी रेडियो जॉकी भावना शर्मा रहीं। आरजे भावना ने छात्रों के साथ सामुदायिक रेडियो से जुडी जिम्मेदारियों, श्रोताओं के साथ जुड़ने के लिए संवाद प्रक्रिया,ऑडियंस रिसर्च, सामाजिक विषय चयन व जनजागरण, रेडियो के एक मीडिया टूल के रूप में उपयोगिता, जैसे विषयों पर बातचीत की |
आरजे भावना ने रेडियो लोगों के साथ सीधा और भावनात्मक संबंध स्थापित करता है। आज के समय में जब नए मीडिया पर वायरल और फेक जानकारी तेजी से फैल रही है, ऐसे में रेडियो तथ्यात्मक और प्रमाणिक सूचना देने का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है। सामुदायिक रेडियो छोटे शहरों और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों को सामने लाने में अहम भूमिका निभाता है तथा समाज के हर वर्ग की आवाज़ बनता है। रेडियो की इस वर्ष की थीम “रेडियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: एआई एक उपकरण है, आवाज नहीं” पर प्रकाश डालते हुए बताया कि एआई केवल एक टूल है, लेकिन असली मानवीय जुड़ाव और संवेदनशीलता रेडियो के माध्यम से ही समाज तक पहुँचती है।
महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. नरेंद्र कुमार जी ने मुख्य वक्ता की सराहना करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय से ही रेडियो का समाज में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। रेडियो ने जनजागरण और राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाई है और आज भी समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है। कार्यक्रम संयोजक व महाविद्यालय पीआरओ वीरेंद्र सिंह ने स्वतंत्रता पश्चात रेडियो का भारत के विकास में योगदान पर बात की | पीआरओं ने बताया कि रेडियो का पहला इस्तेमाल एक मनोरंजन साधन के रूप में नहीं बल्कि भारत की कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, कृषि की उन्नत तकनीकों, बीजों व मौसम की जानकारी; कुपोषण, भुखमरी, महामारी जैसी समस्याओं को हल करने; महिला शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, वयस्क शिक्षा को बल देने; बाल विवाह, घूंघट प्रथा, बाल मजदूरी, अशिक्षा जैसी समस्याओं के प्रति भारतीय जनमानस को जागृत करने के लिए किया गया |
विभागाध्यक्ष रचना कसाना ने सामुदायिक रेडियो के महत्व पर प्रकाश डाला और कार्यक्रम आयोजन के लिए प्राचार्य महोदय, मुख्य वक्ता, संयोजक, सचिवों व छात्रों को धन्यवाद दिया | कार्यक्रम आयोजन सचिव के रूप में हिमानी जांगड़ा तथा कृतिका ने कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर कुल 38 विद्यार्थियों ने इस व्याख्यान में सक्रिय भागीदारी की और विषय से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक रहा, जिसमें उन्हें रेडियो की प्रासंगिकता, विश्वसनीयता और सामाजिक महत्व को समझने का अवसर प्राप्त हुआ।
