फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित 16वां इंटरनेशनल रेलवे इक्विपमेंट एग्ज़िबिशन (IREE 2025) शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। तीन दिवसीय इस प्रदर्शनी में नवाचार, सहयोग और वैश्विक सहभागिता की झलक देखने को मिली। इस आयोजन का उद्घाटन रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा किया गया।
यह आयोजन भारतीय रेल क्षेत्र में हो रहे तकनीकी परिवर्तन का उत्कृष्ट प्रदर्शन था, जिसने देश की आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रहे प्रयासों को उजागर किया।
प्रमुख प्रतिभागियों में डेडिकेटेड फ़्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) द्वारा लगाया गया तकनीक-प्रधान स्टॉल (संख्या 4.25) आकर्षण का केंद्र बना रहा। यह स्टॉल नवाचार, परिचालन उत्कृष्टता और स्थायित्व पर DFCCIL के फोकस को दर्शाता है, जिसमें आधुनिक फ़्रेट प्रबंधन प्रणाली, अत्याधुनिक संचालन तकनीकें और आगामी अवसंरचना योजनाएँ प्रदर्शित की गईं।
इस स्टॉल का उद्घाटन प्रवीण कुमार, प्रबंध निदेशक, डीएफ़सीसीआईएल ने किया। इस अवसर पर शोभित भटनागर, निदेशक (ओपी एंड बीडी); शिवपूजन वर्मा, जीजीएम (बिज़नेस डेवलपमेंट); अमित सौराष्ट्री, जीएम (कॉरपोरेट कोऑर्डिनेशन); रोशन सिंह, एजीएम (ओपी एंड बीडी) तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
डीएफ़सीसीआईएल के स्टॉल पर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश कुमार, डीएफ़सीसीआईएल के पूर्व निदेशक (ओपी एंड बीडी) नंदुरी श्रीनिवास, पूर्व निदेशक (प्रोजेक्ट प्लानिंग) पंकज सक्सेना, पीईडी (मैकेनिकल कोचिंग) सचिंदर मोहन शर्मा तथा अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी भ्रमण किया और निगम की तकनीकी एवं जानकारीपूर्ण प्रदर्शनी की सराहना की।
इस स्टॉल पर आगंतुकों को डेडिकेटेड फ़्रेट कॉरिडोर की उन्नत संचालन प्रणाली, प्रभावी माल परिवहन मॉडल तथा भविष्य की विस्तार योजनाओं से अवगत कराया गया। प्रदर्शन के माध्यम से डीएफ़सीसीआईएल के उस योगदान को रेखांकित किया गया जो भारत की माल परिवहन प्रणाली को विश्वस्तरीय बनाने में सहायक है।
इस अवसर पर प्रवीण कुमार, प्रबंध निदेशक, डीएफ़सीसीआईएल ने कहा:
“आईआरईई एक उत्कृष्ट मंच है जो भारत के विशाल रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण और विस्तार में योगदान का अवसर प्रदान करता है। डीएफ़सीसीआईएल निरंतर तकनीकी उत्कृष्टता, स्थायित्व और माल परिवहन को भारत की आर्थिक प्रगति के प्रमुख साधन के रूप में बढ़ावा देने के लिए कार्यरत है।”
उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय मंचों में भागीदारी से डीएफ़सीसीआईएल भारत को वैश्विक रेल लॉजिस्टिक्स में अग्रणी बनाने के अपने विज़न को और मज़बूत कर रहा है तथा यह सुनिश्चित कर रहा है कि देश के फ़्रेट कॉरिडोर विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप हों।
तीन दिनों तक चली इस प्रदर्शनी में रेलवे संगठनों, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी कंपनियों, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शकों और उद्योग विशेषज्ञों — जैसे जोखिम मूल्यांकन विशेषज्ञ, इंजीनियरिंग निदेशक, संचालन और सुरक्षा अधिकारी, लॉजिस्टिक कंपनियाँ और नीति निर्माता — ने भाग लिया। यह आयोजन न केवल तकनीकी नवाचारों के प्रदर्शन का मंच रहा बल्कि उद्योग, सरकार और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग और ज्ञान-विनिमय का भी अवसर बना।
तीन दिनों में 50,000 से अधिक आगंतुकों की भागीदारी के साथ, आईआरईई 2025 भारत की बढ़ती क्षमताओं और रेल परिवहन के भविष्य को पुनर्परिभाषित करने की महत्वाकांक्षा का प्रतीक बनकर उभरा।
