फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर 2 ,अक्टूबर- 2025 को फरीदाबाद ,महानगर के विभिन्न क्षेत्रों में विजयदशमी का विशेष उत्सव गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर संघ के स्वयंसेवक, गणमान्य नागरिक और समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
इस दिन कुल 15 कार्यक्रम विभिन्न उपनगरों और शाखाओं में आयोजित किए गए, जिनमें केसरी नगर, दीनदयाल नगर, महाराणा प्रताप नगर, विनायक नगर, केशव नगर, बाबा सूरदास नगर, महर्षि अरविंद नगर, विवेकानंद नगर, वीर सावरकर नगर, RPS सवाना और गुरु गोविंद सिंह नगर प्रमुख स्थान रहे।
मुख्य अतिथिगण और वक्ता:
राजेश गर्ग (जिला एवं सत्र न्यायधीश प्रमुख)
डॉ. महेश सचदेवा और डॉ. गजेन्द्र कुमार गोयल
धर्मवीर गुप्ता (चेयरमैन सुधा रस्तोगी डेंटल मेडिकल कॉलेज)
अजेय जुनेजा (President, Imperial Estate SPR)
अन्य माननीय उद्योगपति, सामाजिक कार्यकर्ता और संघ के प्रमुख
उन्होंने अपने उद्बोधन में संघ की शताब्दी यात्रा की उपलब्धियों, संगठन, अनुशासन और सेवा की भावना के महत्व को उजागर किया। सभी ने यह स्पष्ट किया कि संघ का कार्य केवल संगठन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के सर्वांगीण उत्थान और राष्ट्र निर्माण का व्यापक अभियान है।
उत्सव की प्रमुख विशेषताएँ:
शस्त्र पूजन एवं प्रार्थना, जिसमें शक्ति, संयम और राष्ट्रनिष्ठा का संदेश दिया गया।
स्वयंसेवकों द्वारा दंड संचालन, व्यायाम, योगासन और घोष के साथ पथ संचलन।
देशभक्ति गीतों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना का प्रसार।
साहित्य और संघ की पत्रिकाओं का प्रचार, प्रदर्शनी और स्टॉल के माध्यम से जनसामान्य को जागरूक किया गया।
समाज के विभिन्न वर्गों से माताएँ, बहनें, बच्चे और नागरिकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता।
उपस्थिति का सारांश (कुल सभी कार्यक्रम):
पूर्ण गणवेश में स्वयंसेवक: लगभग 1,688
बिना गणवेश उपस्थित स्वयंसेवक: लगभग 37
सज्जन शक्ति / परिवारजन: लगभग 260
संकलन में सहभागिता: लगभग 1,172
घोषवादक संख्या: लगभग 120
नए स्वयंसेवक बने: लगभग 135
नए गणवेश तैयार हुए: लगभग 100
विशेष बातें:
कई कार्यक्रमों में तीन पीढ़ियों (दादा-पिता-पुत्र) के स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
गणवेश संचालन और पथ संचलन में अनुशासन और सहभागिता का उच्च स्तर दिखाई दिया।
कुछ कार्यक्रमों में समाज के विभिन्न क्षेत्रों की जागरण टोलियाँ बनाई गईं, जो बस्ती प्रतिनिधित्व का प्रतीक थीं।
मुख्य अतिथियों और वक्ताओं ने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे शिक्षा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता के मार्ग पर चलकर सशक्त, समरस और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान दें।
विजयदशमी के इस महापर्व ने राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक समरसता को प्रबल किया। शताब्दी वर्ष के इस अवसर पर आयोजित ये सभी कार्यक्रम संघ की संगठनात्मक शक्ति और समाज सेवा की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
