फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे
अग्रवाल महाविद्यालय बल्लभगढ़ में प्राचार्य डॉ. कृष्ण कांत गुप्ता जी के कुशल नेतृत्व में “समग्र कल्याण प्रबंधन” विषय पर राष्ट्रीय स्तरीय सात दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम किया जा रहा है । कोविड-19 महामारी के कारण सभी गतिविधिया रुक गई थी, इसके बाद सभी का ध्यान हॉलिस्टिक वैलनेस की तरफ आकर्षित हुआ। जिसमें शारीरिक,मानसिक, आध्यात्मिक, भावनात्मक और बौद्धिक विकास हो, जिससे सभी लोग स्वस्थ और खुशहाल जीवन यापन कर सकें । कल कार्यक्रम के शुभारंभ पर महाविद्यालय प्राचार्य जी ने विभिन्न महाविद्यालय और विश्वविद्यालय से आए हुए सभी शिक्षकों और प्रशासकों का स्वागत करते हुए अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा की शिक्षकों का कार्य सिर्फ शिक्षा प्रदान करना और विद्यार्थियों द्वारा अच्छे मार्क्स प्राप्त करना ही नहीं है अपितु आज शिक्षकों का कार्यभार हॉलिस्टिक एजुकेशन है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास जरूरी है। उन्होंने बताया कि NEP 2020 में भी हॉलिस्टिक एजुकेशन पर ही जोर दिया गया है। आज दिनांक 22 नवंबर 2022 को कार्यक्रम कें द्वितीय दिन मुख्य वक्त्री मंजूश्री जी (योगा प्रशिक्षक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की महिला शाखा (महिला पतंजलि योग समिति) राज्य अध्यक्ष)से रही l उन्होंने समग्र कल्याण के बारे में प्रतिभागियों को बताया। उन्होंने योग की महत्वता को बताते हुए बताया कि योग के माध्यम से ही आप अपना सर्वांगीण विकास कर सकते हो। योग में आपकी हर बीमारी का इलाज है।साथ ही बताया कि जीवन में बौद्धिक विकास से ज्यादा जरूरी है भावनात्मक विकास। सुख-शांति हासिल करने और सफल व सार्थक जीवन जीने के लिए भावनात्मक विकास के लक्ष्य पर ध्यान देना जरूरी है ताकि हर व्यक्ति अपनी भावनाओं पर नियंत्रण कर सके। जैसे मजबूत नींव पर बहुमंजिले भवन की स्थिरता बनी रहती है वैसे ही भावना हमारे जीवन की नींव है। हमारी भावना जितनी सकारात्मक और नियंत्रित होगी, हमारा जीवन उतना ही सफल और सार्थक बनेगा। भावनाओं पर अनियंत्रण से ही जीवन लड़खड़ाने लगता है। तभी तो आए दिन जीवन में भावनात्मक समस्याएं बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। आपके व्यवहार में आपकी भावनाएं जैसे क्रोध, ईष्र्या, उल्लास, खुशी, निराशा, पीड़ा-कैसे अभिव्यक्त होती हैं, इसका सीधा प्रभाव मनुष्य के अवचेतन मन पर पड़ता है l इसके लिए मैडम ने कुछ शारीरिक क्रियाएं बताई और जीवन में अपनाने पर जोर दिया l यह कार्यक्रम संयोजक डॉ. मनोज शुक्ला, समन्वयक डॉ. शिल्पा गोयल और डॉ. इनायत चौधरी की देखरेख में किया गया। राष्ट्रीय स्तरीय सात दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम में भारत कें विभिन्न राज्यों से 200 से भी अधिक प्रतिभागियों ने नामांकन कराया l
