
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / सैक्टर 21 बी स्थित जीवा पब्लिक स्कूल में किंडरगार्टन से लेकर कक्षा आठवीं तक के छात्रों एवं उनके अभिभावकों के लिए `अभिभावक-शिक्षक भागीदारी मंथन’ 3.0 कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के उज्ज्वल और सफल भविष्य के लिए अध्यापकों और अभिभावकों की भागीदारी को सुनिश्चित करना है। बच्चों की सफलता के लिए आवश्यक है कि उनको बचपन से ही शिक्षा के साथ-साथ सिद्धांतों और मूल्यों से भी अवगत कराया जाए। इसी श्रृंखला में पैरेंट्स पार्टनरशिप कार्यक्रम के माध्यम से अभिभावकों को भी विद्यालय के सभी सिद्धांतों, शिक्षा पद्धति एवं विशेष गतिविधियों से अवगत कराया गया। जिससे इस उद्देश्य में अभिभावकों का भी मुख्य रूप से योगदान रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय परंपरा के अनुरूप दीप प्रज्ज्वलन के साथ अत्यंत गरिमामय वातावरण में किया गया। इस पावन अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष श्री ऋषिपाल चौहान, उपाध्यक्षा श्रीमती चंद्रलता चौहान, एकेडमिक हेड श्रीमती मुक्ता सचदेव तथा प्रधानाचार्या श्रीमती नरजीत कौर, युवा डायरेक्टर सुश्री मीनाक्षी सिंह, लीड एंड स्ट्रैटेजिक हेड श्री जयवीर सिंह की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और भी बढ़ाया। साथ ही अनेक अभिभावकों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष आत्मीयता प्रदान की।
इसके अतिरिक्त जीवा संस्थान के सीईओ श्री मधुसूदन चौहान, युवा डायरेक्टर्स—सुश्री मीनाक्षी सिंह, सुश्री नीरजा चौहान एवं सुश्री काजल चौहान की सशक्त उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशिष्ट गरिमा एवं ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया। आज कार्यक्रम में विशेष रूप से विद्यालय के छात्रों ने मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत कर वातावरण को उल्लासमय बना दिया। इसके साथ ही उनकी आकर्षक नृत्य प्रस्तुति ने सभी उपस्थित जनों का मन मोह लिया और कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।
इस अवसर पर विद्यालय की कक्षा पाँच की प्रतिभाशाली छात्रा गर्विका अरोड़ा एवं कक्षा चौथी की स्वास्तिका अरोड़ा को नारो प्रतियोगिता में क्रमशः प्रथम एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने पर गरिमापूर्ण सम्मान प्रदान किया गया। इन दोनों छात्राओं की उत्कृष्ट उपलब्धियों ने विद्यालय का गौरव बढ़ाया और वे सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं।
इसके उपरांत विद्यालय के विशेष उपलब्धियों को पी०पी०टी० के माध्यम से दर्शाया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से अभिभावकों को बेस्ट पैरेन्टिंग टिप्स दिए गए। ‘प्रोजेक्ट हेड’ श्री जयवीर सिंह जी ने इस कार्यक्रम का संचालन किया और यह भी बताया गया कि कैसे अभिभावक अपने बच्चों को संभाले उनकी समस्याओं को समझें एवं उन्हें अच्छे संस्कार दें। वर्तमान समय में अभिभावकों के समक्ष मुख्य रूप से यह कठिनाई आ रही है कि वे अपने बच्चों को किस प्रकार उचित मार्गदर्शन दें। उन्हे नहीं पता कि वे अपने बच्चों को भविष्य के लिए किस प्रकार तैयार करें, क्योंकि बच्चे अपने अभिभावकों का कहना नहीं मानते हैं, जिसके कारण बच्चों को समझाना और उनको उपयुक्त शिक्षा दे पाना एक चुनौती बन गया है।
उन्होंने अभिभावकों को सफल पैरेन्टिंग टिप्स दिए और उनको कुछ विशेष तरीके भी बताए। अभिभावकों को समझाते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय के साथ-साथ अभिभावकों की बराबर साझेदारी होनी चाहिए। अभिभावक वर्तमान स्थिति में अपने बच्चों को समय अवश्य दें, उनकी बातों को सुनकर समझने का प्रयास करें। बच्चों पर कभी दबाव न बनाएं, बच्चों को प्रोत्साहन दें, उनकी कमियों को स्वीकार करते हुए उन्हें उसी आधार पर आगे के लिए तैयार करें। उन्हें किसी भी तरह से हतोत्साहित न करें।
इसके अतिरिक्त, विद्यालय के सभी क्लबों के विद्यार्थियों ने भी अपनी-अपनी विशिष्टताओं और उल्लेखनीय उपलब्धियों को अत्यंत प्रभावशाली एवं आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करते हुए सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष श्री ऋषिपाल चौहान ने कहा कि “मंथन” कार्यक्रम एक सार्थक मंच है, जहाँ अभिभावक और शिक्षक मिलकर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य हेतु विचार साझा करते हैं। यह संवाद उनके सर्वांगीण विकास की मजबूत नींव रखता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल विद्यालय तक सीमित नहीं होती, परिवार का सहयोग भी उतना ही आवश्यक है। दोनों के समन्वय से बच्चों में आत्मविश्वास और अनुशासन का विकास होता है।
इस अवसर पर उन्होंने जीवा लर्निंग सिस्टम के बारे में बताते हुए कहा कि यह बच्चों के समग्र विकास पर केंद्रित एक प्रभावी पहल है।
उपाध्यक्षा श्रीमती चंद्रलता चौहान, एकेडमिक हेड श्रीमती मुक्ता सचदेव एवं प्रधानाचार्या श्रीमती नरजीत कौर उपस्थित रहीं और उन्होंने कार्यक्रम का अवलोकन किया। प्रधानाचार्या श्रीमती नरजीत कौर ने विद्यालय की सभी प्रमुख गतिविधियों से अभिभावकों को विस्तृत रूप से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को विद्यालय की प्रत्येक गतिविधि की जानकारी रखना अत्यंत आवश्यक है तथा उन्हें प्रतिदिन अपने बच्चों के प्रत्येक क्रियाकलाप पर ध्यान देते हुए उनकी प्रगति से निरंतर जुड़ाव बनाए रखना चाहिए। अंत में उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विद्यालय और अभिभावकों का समन्वित सहयोग ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सशक्त नींव रखता है।





