फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / उपायुक्त (डीसी) श्री आयुष सिन्हा ने कुछ समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के संदर्भ में स्पष्ट किया है कि 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में झूला दुर्घटना के संबंध में गठित जांच समिति तथा मेले में लगाए गए झूलों/राइड्स के नियमित निरीक्षण हेतु पूर्व में गठित समिति, दोनों अलग-अलग समितियां हैं। दोनों की संरचना, उद्देश्य एवं कार्यक्षेत्र पूर्णतः भिन्न हैं। इन दोनों समितियों को एक ही समिति के रूप में प्रस्तुत किया जाना तथ्यात्मक रूप से गलत एवं भ्रामक है। दोनों समितियों के सदस्य पूर्णतः अलग-अलग है। समिति के सदस्यों में दोहराव नहीं है। ऐसे में यह कहना कि दोनों समितियां एक ही हैं, तथ्यात्मक रूप से गलत, निराधार एवं भ्रामक है।
उन्होंने बताया कि मेले के आयोजन के दौरान सुरक्षा मानकों की सतत निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक नियमित मॉनिटरिंग/निरीक्षण समिति का गठन किया गया था। इस समिति को निर्देश दिए गए थे कि मेले में स्थापित झूलों/राइड्स एवं अन्य उपकरणों का नियमित निरीक्षण किया जाए तथा प्रत्येक 24 घंटे में निरीक्षण/रिव्यू रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि आगंतुकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस नियमित निरीक्षण समिति में कार्यकारी अभियन्ता, इलैक्ट्रीकल इन्सपैक्टोरेट, फरीदाबाद (अध्यक्ष); कार्यकारी अभियन्ता, लोक निर्माण विभाग (मैकेनिकल), फरीदाबाद; कार्यकारी अभियन्ता, इलैक्ट्रीकल, लोक निर्माण विभाग, फरीदाबाद; अध्यक्ष, इलैक्ट्रीकल विभाग, वाई.एम.सी.ए. विश्वविद्यालय, फरीदाबाद; कार्यकारी अभियन्ता, हरियाणा टूरिज्म कॉर्पोरेशन., फरीदाबाद; अग्निशमन अधिकारी, फरीदाबाद; उप-मण्डल अभियन्ता, इलैक्ट्रीकल, एच.एस.वी.पी., फरीदाबाद; इन्चार्ज (मैकेनिकल), हरियाणा राज्य परिवहन विभाग, फरीदाबाद; तथा कनिष्ठ अभियन्ता, हरियाणा टूरिज्म कॉर्पोरेशन., फरीदाबाद सदस्य के रूप में शामिल थे।
उपायुक्त ने आगे बताया कि झूला दुर्घटना की घटना के उपरांत तथ्यों की विस्तृत जांच के लिए एक पृथक जांच समिति का गठन किया गया है। इस समिति का उद्देश्य दुर्घटना के कारणों का पता लगाना, यदि कोई लापरवाही पाई जाए तो उसकी जांच करना तथा उत्तरदायित्व निर्धारित करना है। इस जांच समिति की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त, फरीदाबाद-सह-मेला प्रशासक द्वारा की जा रही है। समिति में पुलिस उपायुक्त (डीसीपी), एनआईटी, फरीदाबाद-सह-मेला पुलिस अधिकारी, विभागाध्यक्ष (मैकेनिकल विभाग), वाईएमसीए विश्वविद्यालय, फरीदाबाद (विशेषज्ञ सदस्य); कार्यकारी अभियन्ता (मैकेनिकल विंग), सिंचाई विभाग तथा कार्यकारी अभियन्ता (इलेक्ट्रिकल विंग) एचएसवीपी सदस्य के रूप में शामिल हैं।
डीसी आयुष सिन्हा ने पुनः स्पष्ट किया कि दोनों समितियों की प्रकृति, उद्देश्य एवं संरचना अलग-अलग है। अतः यह कहना कि दोनों समितियां एक ही हैं, पूर्णतः असत्य है।
वर्तमान में दुर्घटना संबंधी जांच तीव्र गति से जारी है। जांच प्रक्रिया की नियमित रूप से समीक्षा की जा रही है तथा सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। समिति शीघ्र ही अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करेगी तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
