फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / आर्य समाज सेक्टर-7ए के तीन दिवसीय 43वें वार्षिक उत्सव का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस महोत्सव के दौरान परिवारोद्धार, युवा सम्मेलन, राष्ट्र रक्षा सम्मेलन और महिला सम्मेलन जैसे प्रेरणादायक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें आनन्द महता, कृपाल सिंह, दिनेश जिन्दल, प्रेम प्रकाश पसरीचा, जितेन्द्र भाटिया, ऋषिपाल चौहान, प्रकाश देवी, महेन्द्र महतानी, सहित अन्य विशेष आमंत्रित अतिथि उपस्थित रहे और उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
समापन समारोह का मुख्य आकर्षण नवनिर्मित यज्ञशाला का उद्घाटन रहा। यज्ञ ब्रह्मा आचार्य डॉ वागीश द्वारा विधिवत यज्ञ संपन्न कराया गया तथा माता शकुंतला आर्य के कर-कमलों द्वारा इस भव्य और सुंदरतम यज्ञशाला का उद्घाटन किया।
भजनोपदेशक आचार्य सतीश ‘सत्यम्’ ने अपने मधुर भजनों के माध्यम से स्वामी दयानंद सरस्वती के आदर्शों पर चलने और एक चरित्रवान समाज के निर्माण का आह्वान किया। कार्यक्रम में मुंबई से आए मुख्य वक्ता, आचार्य डॉक्टर वागीश जी की गरिमामय उपस्थिति ने भी उत्सव की शोभा बढ़ाई। उन्होंने यज्ञ की महत्ता पर प्रकाश डालाते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में यज्ञ केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि एक पूर्ण विज्ञान है जो मनुष्य की भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। यज्ञ करने का मुख्य कारण दिव्य शक्तियों का विकास करना है। मंत्रों की शक्ति और अग्नि के माध्यम से हम ब्रह्मांडीय ऊर्जा को आकर्षित करते हैं, जिससे जीवन में सकारात्मकता और दैवीय कृपा का संचार होता है। आचार्य ने कहा कि यज्ञ हमें ‘इदं न मम’ (यह मेरा नहीं है) का संदेश देता है। आहुति के माध्यम से हम अपने अहंकार और विकारों को त्यागते हैं, जिससे चित्त की शुद्धि होती है और साधक आत्मिक शांति का अनुभव करता है।
समारोह में मुख्य अतिथि श्री कर्मचन्द शास्त्री, विशिष्ट अतिथि पुनीत बत्रा, , देशबंधु आर्य तथा समर्पित कार्यकर्ताओं को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रधान निष्ठाकर आर्य ने इस निर्माण में सहयोग देने वाले दानदाताओं और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए समस्त कार्यकारिणी एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
प्रधान निष्ठाकर आर्य ने बताया कि यह यज्ञशाला अपनी स्थापत्य कला और नक्काशी के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसकी बनावट और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। आर्य समाज के प्रधान निष्ठाकर आर्य ने बताया कि यह यज्ञशाला पुरातन राजस्थानी और आधुनिक स्थापत्य कला का एक बेजोड़ मिश्रण है। इसके निर्माण के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से विशिष्ट कारीगरों और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री को जुटाया गया है। यह संरचना पूर्णतः पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ है।
कार्यक्रम में, सतीश कौशिक आचार्य राजेन्द्र आर्य, वसु मित्र सत्यार्थी, योगेन्द्र फोर, अविकल आर्य, जिले सिंह, साकेत कौशिक, नन्द किशोर मेहता, विनोद मोदी, अजीत आर्य, प्रेम बहल, प्रकाश देवी, ऊषा सेठी, शकुंतला आर्या, संघमित्रा कौशिक, और भारी संख्या में विभिन्न आर्य समाजों और गुरुकुल से आचार्य, श्रद्धालु, ब्रह्मचारी उपस्थित रहे।
