
फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे/ जे.सी.बोस विश्वविद्यालय वाईएमसीए के मीडिया विद्यार्थियों ने ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम 2025 के अंतर्गत ओखला नई दिल्ली स्थित यश एंटरप्राइजेज प्रिंटिंग प्रेस का शैक्षणिक भ्रमण किया। यह दौरा छात्रों के लिए एक शिक्षाप्रद एवं प्रेरणादायक अनुभव रहा। मीडिया विद्यार्थियों ने प्रिंटिंग प्रक्रिया में उपयोग होने वाली अनेक मशीनों द्वारा प्रिंटिंग कार्यविधि जैसे कलर मैचिंग, ग्राफिक डिज़ाइनिंग, मोल्डिंग, फोल्डिंग, फॉइलिंग, बाइंडिंग, पैकिंग जैसी विधाओं की तमाम बारीकियों को गहनता से जाना।
जे.सी.बोस विश्वविद्यालय के संचार एवं मीडिया तकनीकी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ.पवन सिंह के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुए इस भ्रमण में मीडिया विद्यार्थियों का नेतृत्व वरिष्ठ प्रशिक्षक दुष्यंत त्यागी और प्रॉडक्शन सहायक अंजू सिंह ने किया। इस दौरे की शुरुआत यश इंटरप्राइजेज के संचालक वरुण चौधरी के प्रेरणादायक संबोधन से हुई। उन्होंने बताया कि कैसे उनके पिताश्री एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करते थे और फिर अपनी मेहनत और लगन से यश एंटरप्राइजेज की नींव रखी। उन्होंने पत्रकारिता के विद्यार्थियों को मुद्रण उद्योग के बदलते स्वरूप और तकनीक के साथ तालमेल बिठाने के महत्व को समझाया।
इसके बाद हमें उनके ग्राफिक डिज़ाइनर टीम से परिचय कराया गया, जिन्होंने बताया कि कैसे रचनात्मक डिज़ाइन और आधुनिक सॉफ्टवेयर का उपयोग करके छपाई की प्रक्रिया को सुंदर और प्रभावशाली बनाया जाता है। प्रेस के भ्रमण के दौरान हमें विभिन्न उन्नत मशीनों और तकनीकों को देखने और समझने का अवसर मिला, जिनमें शामिल हैं:
प्रिंटिंग इंडस्ट्री में उपयोग होने वाली मशीनों का विवरण
* हाइडलबर्ग सिलेंडर (जर्मनी) – फाइलिंग कार्य के लिए उपयोगी
* डाई मशीन – प्रिंट को आकार देने और काटने के लिए
* कटिंग मशीन (पोलर मोहर)- सटीक कागज काटने की मशीन
* हाइडलबर्ग प्लैटन प्रेस – पारंपरिक छपाई के लिए
* स्क्रीन प्रिंटिंग तकनीक – हाथ से छपाई की पूरी प्रक्रिया
* स्टेबल पेपर फोल्डिंग मशीन – तेज़ और सटीक कागज मोड़ने के लिए
* टेकबाउंड नियो हार्डकवर बाइंडिंग मशीन – किताबों की हार्ड बाइंडिंग के लिए
इस भ्रमण ने मीडिया विद्यार्थियों को प्रिंटिंग इंडस्ट्री के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया और यह समझने में मदद की कि किस तरह पारंपरिक तकनीकों और आधुनिक मशीनों का समन्वय एक उत्कृष्ट उत्पाद बनाता है। यह अनुभव न केवल शैक्षणिक दृष्टि से लाभकारी रहा, बल्कि छात्रों को प्रिंट और विज़ुअल कम्युनिकेशन के क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं को समझने और अपनाने के लिए प्रेरित भी किया।
