फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / जब कभी भी ऐसी घटना होती है फाउंडेशन अगेंस्ट थेलासीमिया को लगता है की हमने अपने बहुत बड़े परिवार का एक अहम सदस्य खो दिया जिसकी भरपाई होना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। संस्था के महासचिव रविंद्र डुडेजा ने बताया की डॉ मनमोहन सिंह ने थेलासीमिया ग्रस्त बच्चो को जो प्यार दिया वो कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।
अपने कार्यकाल के समय बच्चो को समय समय पर अपने घर बुलाते रहे। थेलासीमिया ग्रस्त बच्चो लिए पार्टीयो का आयोजन करते रहे। बच्चो को अपने हाथो से उपहार देते रहे। उनकी जितनी तारीफ की जाये कम होगी। डॉ मनमोहन जी ने बच्चो को अपने हाथो से घड़ियां तक उपहार में दी। घर पर जब पार्टी का आयोजन होता था तो कार्यालय की कारो में बच्चो को प्रधानमंत्री निवास का चक्कर लगवाया जाता था। सस्न्था के प्रधान भगवान गुलाटी व् सदस्य जे. के. भाटिया ने बताया की डॉ मनमोहन जी से पाया एक प्यार जो हमेशा बच्चो व् संस्था के सदस्यों के बीच हमेशा कायम रहेगा। डॉ मनमोहन सिंह जी ही नहीं उनकी धर्मपत्नी श्रीमति गुरशरण कौर जी बच्चो की सेवा में अग्रसर रहती थी। बच्चो के साथ बैठ सिख धर्म के बारे में विस्तार से वीरता के किस्से सुनाती थी।
आज थेलासीमिया ग्रस्त बच्चो को सरकार की तरफ से जो सुविधाएं मिल रही है उनमे डॉ मनमोहन सिंह जी का विशेष योगदान है।डॉ मनमोहन सिंह जी ने प्रधान मंत्री पद पर रहते संस्था के नाम एक प्रेरणादायक सन्देश भेजा था वो अपने आपमें एक जीवन को सुधारने का सन्देश है जो इस प्रकार हैमुझे यह जानकर खुशी हुई कि थैलेसीमिया के खिलाफ फाउंडेशन थैलेसीमिया के खिलाफ लड़ाई लड़ने में बहुमूल्य सेवाएं प्रदान कर रहा है, जिसने हमारे देश में बड़ी संख्या में बच्चों को प्रभावित किया है।पूरी तरह से अपने जीवन के अंत तक समय-समय पर रक्त आधान और दवाओं की नियमित आपूर्ति पर निर्भर रहने वाले, थैलेसीमिया के संकट से पीड़ित बच्चों को सहायता और सबसे बढ़कर देखभाल, स्नेह और समझ की आवश्यकता होती है। साथ ही मानव होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपने बच्चों के सामने आने वाली इस चुनौती का समाधान करें। साहस और करुणा का आह्वान करते हुए हमें इस उद्देश्य के लिए स्वेच्छा से रक्तदान करने के लिए आगे आना चाहिए और इस बीमारी से प्रभावित बच्चों की पीड़ा को कम करने और उन्हें अपने जीवन के लिए इस गंभीर खतरे का सामना करने के लिए मुस्कुराने के लिए अपनी पूरी क्षमता से सहायता देनी चाहिए। ऐसा दृष्टिकोण न केवल बच्चों की मदद करता है बल्कि हमें भी शुद्ध करता है और हमारे जीवन को महान और सेवा उन्मुख बनाता है।
इस प्रकार थैलेसीमिया प्रभावित बच्चों की सेवा करके हमें यह महसूस करना चाहिए कि उन्होंने हमें उस बड़े लक्ष्य को साकार करने का अवसर दिया है जिसके लिए मनुष्य जन्म लेता है और उसे प्राप्त करने का प्रयास करता है।मैं थैलेसीमिया के खिलाफ फाउंडेशन को उसके ईमानदार प्रयासों के लिए बधाई देता हूं, मुझे यकीन है कि इससे और गति मिलेगी और बीमारी के पीड़ितों को उनके जीवन को अधिक सार्थक और सम्मानजनक बनाने के लिए लाभ मिलेगा।
