
फरीदाबाद, जनतंत्र टुडे / फरीदाबाद कालीबाड़ी सेक्टर 16 ने विजयादशमी पर लोगों को शुभकामनाएं दीं, ‘हम कामना करते हैं कि आप सभी मां दुर्गा और प्रभु श्री राम के आशीर्वाद से जीवन के हर क्षेत्र में जीत हासिल करें।’
आज 12 अक्टूबर सिर्फ दशहरा ही नहीं, विजयदशमी भी है। विजयादशमी या दशहरा, बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था और इसी मान्यता के साथ रावण के पुतले जलाने की संस्कृति शुरू हुई।
फरीदाबाद कालीबाड़ी में भी आज पिछले पांच दिनों, महा पंचमी से चलने वाली दुर्गोत्सव की प्रतिमा विषर्जन के साथ समापन की घोषणा की गयी है। कालीबाड़ी प्रांगण में आज दशमी के दिन महिलाये और श्रद्धालु की भीड़ सुबह 10 बजे से ही विसर्जन के लिए ले जाने से पहले देवी को भारी मन से विदाई देती देखि गयी। विजया दशमी के अनुष्ठानों में से एक में पारम्परिक सिन्दूर खेला की रस्म शामिल है जहां विवाहित महिलाएं देवी को सिन्दूर और मिठाई चढ़ाती हैं। इसके बाद वे एक-दूसरे को सिन्दूर लगाती हैं और अपने पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं। ऐसा कहा जाता है कि देवी दुर्गा अपने बच्चों भगवान गणेश, कार्तिकेय, देवी सरस्वती और लक्ष्मी के साथ चार दिनों के लिए अपने माता मेनोका और पिता गिरिराज – से मिलने आती हैं और इस दौरान उन्हें विभिन्न प्रकार के भोग लगाए जाते हैं। दशमी के दिन, देवी के भगवान शिव, अपने पति के घर लौटने का समय होता है, और भक्त उनके माथे और पैरों पर सिन्दूर लगाकर और उन्हें पान और मिठाइयाँ चढ़ाकर उन्हें भव्य विदाई देना सुनिश्चित करते हैं। विजयादशमी का सार एक ही है, अंधकार पर प्रकाश की विजय और धार्मिकता की जीत का जश्न मनाना।
मी) से शुरू हुयी विभिन्न रंगारंग एवं अद्वितीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों के मंचन की भी आज अंतिम दिवस है। आज शाम 07:30 बजे शांति जल और मिष्टी मुख अनुष्ठान के पश्चात ही शांतनु भट्टाचार्य के ‘खोनिका’ क्वायर समूह द्वारा संगीत परिवेसन की जाएगी एवं प्रसिद्द मिमिक्री व हास्य कलाकार अनूप द्वारा अपनी कला की प्रदर्शन की जाएगी। अंत में ‘कवी रवितीर्थ’ द्वारा एक अभूतपूर्व नृत्य नाटिका प्रस्तुत की जाएगी।
प्रधान डॉक्टर प्राणजीत भौमिक, सचिव अचिंत्य कुमार पंडित, बिस्वनाथ सरकार, सानतनु देब सरकार, निपेंद्र कुमार साहा, अभिजीत गांगुली, डेबासिस बसाक जी सी मुखर्जी, मलय तपादर, डेबासिस घोष,तपन बेरा, मृणमॉय चक्रवर्ती कार्यकर्म मे उपस्थित रहे ।
