
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते अर्थात् इस दुनिया में ज्ञान के समान पवित्र और कुछ नहीं है। श्रीमद्भगवद् गीता में लिखे इस पंक्ति की सार्थकता को व्यापक रूप देने के लिए प्रयागराज के महाकुंभ में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की ओर से 7/2/25 से 9/2/25 के बीच ज्ञान महाकुंभ का आयोजन किया गया है। तीन दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन के इसी श्रृंखला में आचार्य सम्मेलन आयोजित हुआ। ऋषिपाल चौहान कोशिक्षा, संस्कृति उत्थान न्यास’ के इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया।
उन्होंने कार्यक्रम में जीवा लर्निंग सिस्टम के विषय में विस्तारपूर्वक वर्णन किया। जीवा लर्निंग
सिस्टम की आज चारों ओर चर्चा है , जीवा लर्निंग सिस्टम नई शिक्षा नीति के अनुरूप है। यह पद्धति एक नई
सोच देने वाला छात्र केंद्रित स्कूल है, जहाँ सार्वभौमिक शिक्षा और परंपरागत भारतीय मूल्यों का समावेश
करके उच्च कोटि की शिक्षा दी जाती है और बच्चों के चातुर्दिक विकास पर ज़ोर दिया जाता है।
जीवा पब्लिक स्कूल के चेयरमैन श्री ऋषिपाल चौहान ने इस अवसर पर बताया कि उनके विद्यालय में
पंचकोष आधारित शिक्षा पद्धति से पढ़ाया जाता है । उनके जीवा माॅडल के द्वारा प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी
प्रकृति एवं प्रवृत्ति के आधार पर शिक्षा दी जाती है।
जीवा पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष ऋषिपाल चौहान को प्रयागराज में महाकुंभ के अवसर पर `शिक्षा संस्कृति
उत्थान न्यास’ के राष्ट्रीय सचिव डॉ० अतुल कोठारी द्वारा सम्मानित भी किया गया। प्रयागराज में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे और सभी ने अपने
अंदाज में अपने विचारों को प्रकट किया। जिसमें विशेष रूप से शिक्षकों को शिक्षक नहीं आचार्य बनने के लिए
प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में मानव रचना विश्वविद्यालय के कुलगुरू डॉ. संजय श्रीवास्तव, स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय
के कुलाधिपति डॉ. अजय तिवारी, अमृता विश्व विद्यापीठम, एसजीटी युनिवर्सिटी से डॉ. अनिल, इंद्रशील
युनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. धर्मेश जयशाह, कामधेनु आर्ट्स एंड साइंस काॅलेज से डॉ. अरुणधिति, उपस्थित
रहे, शारदा समूह से डॉ. अंबिका ने अपने-अपने संस्थानों की देश के शैक्षिक विकास में योगदान पर भूमिका
को सभी के समक्ष रखा। इसके साथ-साथ कार्यक्रम में आईआईआईटी इलाहाबाद के संचालक माननीय मुकुल
सुतावणे जी भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा की पुनर्स्थापना के द्वारा भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए प्रयत्नशील होने के
लिए ऊं ध्वनि के साथ संकल्प पत्र पारित किया गया।





