
फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे
डी ए वी शताब्दी महाविद्यालय फरीदाबाद के भारतीय ज्ञान परम्परा एवं आर्य समाज इकाई के सानिध्य में बी ए विभाग द्वारा यज्ञ का आयोजन किया गया। इस यज्ञ में प्राध्यापकों के साथ नवागंतुक प्रथम वर्ष के लगभग 65 विद्यार्थियों ने यज्ञ में भाग लिया। महाविद्यालय की कार्यकारी प्राचार्या डॉ अर्चना भाटिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ज्ञान दो प्रकार का होता है शाब्दिक ज्ञान और व्यवहारिक ज्ञान। कक्षा में जो हम पढ़ते हैं वो शाब्दिक ज्ञान है और उस ज्ञान को आत्मसात कर हम जो दूसरों के साथ व्यवहार करते हैं वो व्यवहारिक ज्ञान है।
व्यवहारिक ज्ञान, इस शाब्दिक ज्ञान से बढ़कर होता है। क्योंकि शाब्दिक ज्ञान तो रावण और दुर्योधन के पास भी था। फिर भी वे दोनों अपने जीवन में असफल हो गए। जबकि श्री रामचंद्र और श्री कृष्ण दोनों अपने जीवन में सफल हुए। क्योंकि उनके पास शाब्दिक ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान भी था।
श्री रामचंद्र और योगिराज कृष्ण ने वेद आदि शास्त्रों का ज्ञान तो प्राप्त किया ही, साथ ही साथ उन्होंने अपने शास्त्रीय ज्ञान को अपने व्यवहार में भी उतारा, जिससे कि उनका व्यवहार उत्तम हो गया। इस उत्तम व्यवहार के कारण ही आज लाखों वर्ष बाद भी श्री राम और योगिराज कृष्ण का सम्मान हो रहा है।
हमें भी अपने जीवन मे उत्तम व्यवहार या आचरण को अपनाना चाहिए। यज्ञ में डॉ अमित शर्मा ने यज्ञब्रह्म का पद अलंकृत किया। इस अवसर पर डॉ सुमन तनेजा,डर सोनिया नरूला, ममता,कमलेश,रेखा सिंह ,अर्चना, धर्मबीर आदि प्राध्यापक उपस्थित रहे।





