
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कार्यरत वरिष्ठ रेजीडेंट डॉक्टरों ने डीन डॉ. कालीदास दत्तात्रय चव्हाण पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए सोमवार को हड़ताल पर चले। चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाने से ओपीडी सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित रही, जबकि इमरजेंसी, ऑपरेशन और गर्भवतियों की डिलीवरी जैसी आपातकालीन सेवाएं जारी रखी। चिकित्सकों ने डीन कार्यालय के समीप एकत्रित होकर उनके खिलाफ नारेबाजी भी की।
चिकित्सकों का कहना था कि डीन डॉ. कालीदास दत्तात्रय चव्हाण का रेजीडेंट डॉक्टरों के प्रति व्यवहार की बहुत उदासीन है। वह हमारी समस्याओं को सुनने की बजाय दुत्कार कर अपने कार्यालय से निकाल देते हैं। इससे सभी डॉक्टर काफी आहत है। उन्हीं की तरह मेडिकल की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने और दिन-रात पढ़ाई करने के बाद यहां तक पहुंचते हैं। इस तरह दुर्व्यवहार करना उचित नहीं है। चिकित्सकों का कहना है कि संबंधित अधिकारी के माफी मांगने के बाद ही काम पर वापस लाटेंगे। इसी प्रकार एडमिनिस्ट्रेशन और अकादमिक विभागों के उच्च पदाधिकारी दुत्कारते हैं। रेजीडेंट डॉक्टर की सुनवाई नहीं होने की वजह से उनके हौंसले लगातार बढ़ रहे हैं।
चिकित्सकों का हेल्थ कार्ड जारी किया जाए
डॉ. लखविंदर का कहना था कि हम डॉक्टर दिन रात अस्पताल में काम करते हैं। हमें इंफेक्शन का भी खतरा रहता है। यदि कोई चिकित्सक बीमार हो जाए, तो उसके लिए चिकित्सा की सुविधा नहीं है। यदि किसी डॉक्टर को सिरदर्द की एक गोली भी चाहिए तो उसे भी बाहर मेडिकल स्टोर से ही खरीदना पड़ता है। इन्होंने प्रत्येक डॉक्टर के हेल्थ कवरेज की मांग की और सभी का हेल्थ जारी करने की बात रखी। उन्होंने बताया कि कई डॉक्टरों के अभिभावक पूरी तरह उन पर निर्भर है, लेकिन उनके अभिभावकों को ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज की तरफ कोई चिकित्सा सुविधा नहीं दी जाती।
ओपीडी आंशिक रूप प्रभावित
सोमवार को कार्यदिवस का पहला दिन होता है। इसके चलते अन्य दिनों के मुकाबले अधिक भीड़ रहती है। चिकित्सकों ने ओपीडी सेवाएं पूरी तरह प्रभावित रही। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने पहले से ही अन्य चिकित्सकों की ड्यूटी लगा दी थी। इसके चलते हड़ताल का ओपीडी पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। ओपीडी में चिकित्सकों की संख्या कम होने से मरीजों को इंतजार लंबा हो गया था।
गलत तरह भर्ती का आरोप लगाया
चिकित्सकों ने ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल प्रबंधन ने अलग तरह से नियुक्ति का आरोप लगाया है। इनका कहना था कि नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन ने नियुक्तियों को गलत करार दिया है और उन्हें उपचार के लिए अयोग्य घोषित किया है, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों की शह पर कार्य कर रहे हैं।
