
फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे
अग्रवाल महाविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का आयोजन अग्रवाल महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. कृष्ण कांत गुप्ता जी की सद्प्रेरणा से हुआ। सेमिनार का विषय-“बौद्धिक संपदा अधिकार” रहा। मुख्य वक्ता के रूप में सी एस हितेश गोयल, (एसोसिएट मेंबर, आई.सी.एस.आई., फरीदाबाद) ने बेहद ज्ञानवर्धक व सारगर्भित वक्तव्य दिया।
इस सेमिनार में महाविद्यालय के इतिहास विभाग के अनेक छात्र-छात्राओं और आभासी माध्यम से भी अनेक प्रतिभागियों ने भाग लिया। सेमिनार का आरंभ सरस्वती वन्दना और श्री हितेश गोयल के ओपचारिक स्वागत से हुआ। अग्रवाल महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. कृष्ण कांत गुप्ता जी ने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए, उन्हें शुभकामनाएं दी। तत्पश्चा्त इतिहास विभागाध्यक्ष व सेमिनार के संयोजक डॉ. जयपाल सिंह ने विद्यार्थियों को मुख्य वक्ता सीएस हितेश गोयल जी का संक्षेप परिचय दिया। मुख्य वक्ता श्री हितेश गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि मनुष्य अपनी बुद्धि से कई तरह के आविष्कार और नई रचनाओं को जन्म देता है। उन विशेष आविष्कारों पर उसका पूरा अधिकार भी है लेकिन उसके इस अधिकार का संरक्षण हमेशा से चिंता का विषय भी रहा है। यहीं से बौद्धिक संपदा अधिकारों की बहस प्रारंभ होती है।
बौद्धिक सम्पदा अधिकार मानव-मस्तिष्क की उपज हैं। दुनिया के देश, कई सदियों से अपने-अपने कानून बना कर इन्हे सुरक्षित करते चले आ रहें हैं। बौद्धिक संपदा (आईपी) एक ब्रांड, आविष्कार, सिंबल, डिजाइन या अन्य प्रकार की रचना का संदर्भ देने वाला शब्द है, जिस पर किसी व्यक्ति, संस्था या व्यवसाय का कानूनी अधिकार है। लगभग सभी व्यवसायों के पास IP का कोई न कोई रूप होता है, जो एक व्यावसायिक संपत्ति हो सकती है। अंत में विद्यार्थियों ने सेमिनार के विषय से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे , सभी जिज्ञासाओं का मुख्य वक्ता ने समाधान किया।
इस सेमिनार की संयोजक सचिव और इतिहास विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ० सुप्रिया ढांडा ने मंच संचालन किया। सेमिनार मुख्य वक्ता के धन्यवाद ज्ञापन और कल्याण मंत्र के उच्चारण से समाप्त हुआ। इस सेमिनार में कुल 87 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
