
फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे
अग्रवाल महाविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का आयोजन अग्रवाल महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ कृष्ण कांत गुप्ता जी की सद्प्रेरणा से हुआ। सेमिनार का विषय- “शोध पत्र लेखन-कला” रहा। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ रश्मि अग्रवाल, (प्रोफेसर, कंप्यूटर एप्लिकेशन विभाग, मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज, फरीदाबाद) ने बेहद ज्ञानवर्धक व सारगर्भित वक्तव्य दिया।
इस सेमिनार में महाविद्यालय के इतिहास विभाग के अनेक छात्र-छात्राओं और आभासी माध्यम से भी अनेक प्रतिभागियों ने भाग लिया। सेमिनार का आरंभ सरस्वती वन्दना और डॉ रश्मि के ओपचारिक स्वागत से हुई। अग्रवाल महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ कृष्ण कांत गुप्ता जी ने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए, शुभकामनाएं दी।
तत्पश्चा्त इतिहास विभागाध्यक्ष व सेमिनार के संयोजक डॉ० जयपाल सिंह ने विद्यार्थियों को मुख्य वक्ता डॉ रश्मि अग्रवाल का संक्षेप परिचय दिया। मुख्य वक्ता डॉ रश्मि अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि शोध पत्र लेखन के क्रम में तथ्य एवं विचारों के अन्तर को ध्यान में रखना होता है। तथ्य को हम सत्य की तरह स्वीकार कर लेते हैं, इन्हें सिद्ध करने के लिए प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है। शोध प्रपत्र में अनेक विचारधाराओं तथा निरीक्षणों को प्रस्तुत किया जाता है, इसमें किसी प्रकार की आशंका होने पर पुष्टि की जा सकती है।
डॉ रश्मि ने शोध पत्र लिखने के छह सरल चरण बताते हुए कहा कि सर्वप्रथम शोध लेख लिखने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए अपने विषय पर शोध कीजिये। विषय का विशेषज्ञ बनने के लिए इंटरनेट, शैक्षिक डेटाबेस और पुस्तकालय का उपयोग करके तथ्यों को जुटाइये और शॉर्ट नोट्स लीजिये। उस विषय में खुद को तल्लीन कर लीजिये और एक निश्चित क्रम से आगे बढ़ते जाइए। अंत में विद्यार्थियों ने सेमिनार के विषय से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, सभी जिज्ञासाओं का मुख्य वक्ता ने समाधान किया।
सेमिनार की संयोजक सचिव और इतिहास विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सुप्रिया ढांडा ने मंच संचालन किया। सेमिनार मुख्य वक्ता के धन्यवाद ज्ञापन और कल्याण मंत्र के उच्चारण से समाप्त हुआ। इस सेमिनार में कुल 106 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
