
फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे
अग्रवाल महाविद्यालय बल्लभगढ़ के अंग्रेजी विभाग द्वारा ‘बौद्धिक संपदा अधिकार’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के मुख्य अतिथि डॉ. कृष्णकांत गुप्ता, प्राचार्य, अग्रवाल महाविद्यालय बल्लभगढ़ रहे। अपने संबोधन में उन्होंने मकर संक्रांति के अवसर पर हार्दिक बधाई दीl उन्होंने संकाय सदस्यों को बौद्धिक संपदा अधिकारों की प्रासंगिकता से अवगत कराया और इसे समकालीन समय में समझने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने
इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (आईपीआर) की तीन शर्तों पर ध्यान केंद्रित किया और बताया कि शिक्षाविदों और छात्रों के लिए इसका अत्यधिक महत्व क्यों है। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. अश्विनी सिवाल, सहायक प्रोफेसर विधि संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय और बौद्धिक संपदा अधिकारों के विशेषज्ञ रहे।
उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकारों और इसकी वैधता पर बात की। उन्होंने इस विषय पर प्रकाश डाला कि संस्थान को बौद्धिक संपदा अधिकारों का प्रबंधन कैसे करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से विभिन्न प्रकार की बौद्धिक संपदा और वास्तविक परिदृश्य में उनके आवेदन का वर्णन किया। उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकारों और सात अन्य संबंधित विषयों जैसे पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, व्यापार रहस्य आदि के अर्थ में अधिक अंतर्दृष्टि और स्पष्टता देने के लिए कई व्यावहारिक उदाहरण दिए।
आईपीआर की ऐतिहासिक उत्पत्ति पर भी चर्चा की गई। ऑडियंस के प्रश्नों व उनके जवाब के साथ सत्र का समापन हुआ। कार्यशाला में फिजिकल मोड में 55 प्रतिभागियों और ऑनलाइन मोड में 21 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्य, डॉ. कृष्णकांत गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन में अंग्रेजी विभाग द्वारा सफलतापूर्वक किया गया। इस कार्यशालामें विभागाधक्ष्या ग्रेजी श्रीमती कमल टंडन, संयोजक डॉ. सारिका कांजलिया, डॉ. गीता गुप्ता, डॉ. इनायत चौधरी, श्री सुभाष कैलोरिया, डॉ. दीप्ति गोयल, मैडम विजया और मैडम शैली नेमहत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अग्रवाल महाविद्यालय बल्लभगढ़ इस तरह की कार्यशालाओं का समय-समय पर आयोजन करता रहता है।
