
फरीदाबाद,जनतंत्र टुडे
अग्रवाल महाविद्यालय बल्लभगढ़ में आंतरिक गुणवत्ता मूल्यांकन प्रकोष्ठ के तत्वाधान में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद बेंगलुरु के सौजन्य से दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस राष्ट्रीय सम्मेलन का विषय ‘ उच्चतर शिक्षण संस्थान में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए एनईपी 2020 के लिए नैक आकलन और प्रत्यायन का मानचित्रण’ रहा। इस अवसर पर उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रुप में प्रोफेसर राजवीर सिंह (कुलपति, महर्षि दयानंद
विश्वविद्यालय, रोहतक) रहे। मुख्य अध्यक्ष एवं संरक्षक के रूप में श्री देवेंद्र कुमार गुप्ता (प्रधान, अग्रवाल महाविद्यालय प्रबंधन समिति), मुख्य वक्ता के रूप में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. कृष्णकांत गुप्ता जी तथा विशिष्ट अतिथि प्रो. एस.के चक्रवर्ती (भूतपूर्व प्रोफ़ेसर, एनआईटी, कुरुक्षेत्र) जी ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उद्घाटन समारोह का
शुभारंभ मां सरस्वती जी की आराधना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। अतिथियों को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. कृष्णकांत गुप्ता जी ने बाहर से आए हुए विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों का स्वागत किया तथा मुख्य वक्ता के रूप में बताया कि नई शिक्षा नीति को समझना व उसको क्रियान्वित करना इस दो- दिवसीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है उन्होंने बताया कि कामयाब होने के लिए बदलते परिवेश के हिसाब से अपनी जीवन पद्धति में बदलाव लाना आवश्यक है, उन्होंने नई शिक्षा नीति में शिक्षक की भूमिका पर भी विशेष बल दिया। प्राचार्य जी की प्रेरणा व दिशा-निर्देशन से महाविद्यालय में समय-समय पर इस तरह के राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित होते रहते हैं। सम्मेलन में प्रथम दिन बड़ी संख्या में लोगों ने पंजीकरण करवाया । सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रोफेसर राजवीर सिंह ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तीन स्तंभों (पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करना, सुचारु रुप से व्याख्यान देना और मूल्यांकन) पर विस्तृत चर्चा की और उन्होंने कहा नैक का मूल्यांकन नई शिक्षा नीति के हिसाब से होना चाहिए। इस सम्मेलन में प्रथम दिन में कुल 4 तकनीकी सत्र रहे जिसमें प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. कृष्णकांत गुप्ता जी ने मुख्य भूमिका निभाई। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता प्रो. एस.के. चक्रवर्ती जी ने की तथा मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. हरप्रीत कौर (प्राचार्या, माता सुंदरी महिला महाविद्यालय, दिल्ली यूनिवर्सिटी) उपस्थित रही। इस सत्र की प्रतिवेदक डॉ. पूनम रौतेला, सहायक प्रोफेसर अग्रवाल महाविद्यालय रही। कार्यक्रम के तृतीय सत्र में प्रोफेसर हरप्रीत कौर मुख्य अध्यक्ष के रूप में रही तथा मुख्य वक्ता की भूमिका डॉ. रुचि त्रिपाठी (सहायक सलाहकार, बेंगलुरु) ने निभाई। इस सत्र की प्रतिवेदक श्रीमती पूजा, (सहायक प्रोफेसर, कॉमर्स) रही। सम्मेलन के चतुर्थ तकनीकी सत्र में मुख्य
अध्यक्ष प्रोफेसर एस.के. चक्रवर्ती जी रहे। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. मनोज शुक्ला (एसोसिएट प्रोफेसर, अग्रवाल महाविद्यालय) रहे। इस सत्र की प्रतिवेदक श्रीमती प्रिया अरोड़ा (सहायक प्रोफेसर, गणित) रही। उद्घाटन सत्र में मंच संचालन डॉ. सुप्रिया ढांडा ने किया। इस दो-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के संयोजक डॉ. मनोज शुक्ला, सह-संयोजक डॉ.
गीता गुप्ता एवं डॉ. रामचंद्र, आयोजन सचिव डॉ. शिल्पा गोयल, संयुक्त आयोजन सचिव डॉ. डिंपल एवं डॉ. इनायत चौधरी रही। कार्यक्रम में श्रीमती कमल टंडन, डॉ. के एल कौशिक, डॉ. संजीव कुमार गुप्ता, डॉ. जयपाल सिंह, डॉ. सारिका एवं श्री विनीत नागपाल जी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों द्वारा सम्मेलन की
कार्यवाही का अनावरण किया गया। डॉ. कृष्णकांत, डॉ. मनोज शुक्ला, डॉ. राम चंदर और डॉ. गीता गुप्ता द्वारा संयुक्त रूप से संपादित एक पुस्तक ‘सतत विकास लक्ष्य और उच्च शिक्षा संस्थान’ का भी विमोचन किया गया। उद्घाटन समारोह के अंत में 36 वे राष्ट्रीय खेल तीरंदाजी में गोल्ड मेडल हासिल करने वाले छात्र सागर शर्मा को सम्मानित
किया गया और एक अन्य छात्रा सुश्री वंदना को छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कॉलेज द्वारा एक सिलाई मशीन भेंट की गई। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. गीता गुप्ता द्वारा किया गया।
