फरीदाबाद की बड़खल झील में 100 करोड़ खर्च होने के बावजूद पानी काला, बदबूदार और जलकुंभी से भरा है, जिससे नौकायान की योजना खतरे में है। जिला उपायुक्त ने पानी की खराब गुणवत्ता पर संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
HighLights
- 100 करोड़ खर्च के बाद भी बड़खल झील का पानी काला, बदबूदार।
- पूरी झील जलकुंभी से ढकी, नौकायान योजना खतरे में।
- डीसी ने पानी की गुणवत्ता पर संज्ञान लिया, जांच के आदेश।
प्रवीन कौशिक, फरीदाबाद। अरावली पहाड़ी स्थित बड़खल झील पानी लबालब होने का सपना तो पूरा हो गया है लेकिन 100 करोड़ लगाकर भी इसमें काफी बदबू रहती है। पानी अधिक काला होने की वजह से बेहद प्रदूषित भी लगता है। इसलिए यहां नौकायान की योजना खतरे में पड़ सकती है। क्योंकि बदबू की वजह से कई बार तो झील के किनारे से पैदल गुजरना मुश्किल हो जाता है।
इतना ही नहीं अब जो भी यहां झील देखने आ रहे हैं, उन्हें केवल जलकुंभी ही दिखाई दे रही है। पूरी झील को जलकुंभी ने अपनी चपेट में ले लिया है। अब झील के पानी के संदर्भ में जिला उपायुक्त आयुष सिन्हा ने संज्ञान लिया है। निगमायुक्त धीरेंद्र खड़गटा को पत्र लिखकर जरूरी कार्रवाई करने के लिए कहा है। साथ ही इसकी रिपोर्ट भी मांगी है।
दो दशक से सूखी थी झील
बड़खल झील दो दशक पूर्व पूरी तरह से सूख गई थी। बड़खल की तत्कालीन विधायक सीमा त्रिखा ने बड़खल विकास रैली में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष बड़खल झील का खोया हुआ रूप वापस बहाल करने की मांग रखी थी। जिसे मुख्यमंत्री ने मंजूर कर लिया था। इसके बाद से झील के नवीनीकरण व इसे पानी से भरने के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र का सुंदरीकरण का काम जारी है। झील का काम पूरा करने की आधा दर्जन डेड लाइन मिस हो चुकी हैं। इस परियोजना पर 100 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
एसटीपी बनाया, पर पानी साफ नहीं हो पाया
झील को भरने के लिए सेक्टर-21ए स्थित सीवर ट्रीटमेंट प्लांट न चुका है। रोज 10 एमएलडी पानी यहां से झील में आ डाला गया जिससे अब झील पूरी तरह से भर चुकी है। लेकिन शायद पानी की गुणवत्ता की ओर अधिकारी ध्यान नहीं दे सके। जिसकी वजह से यह पानी बिल्कुल काला और बदबूदार रह गया है।
जलकुंभी हटाना चुनौती
जलकुंभी एक प्रकार का जलीय पौधा है जो पानी की सतह पर तैरता है। जलकुंभी मुख्य रूप से बाढ़ के पानी, नदियों और नहरों द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर फैलती है। मिट्टी में दबे बीजों द्वारा भी इसका फैलाव होता है। इसका प्रजनन बीजों या पौधे की बढ़वार द्वारा होता है। एक पौधा पांच हजार बीज उत्पन्न कर सकता है। जलकुंभी से पानी में आक्सीजन की कमी हो जाती है जिससे मछलियों की वृद्धि के अलावा अन्य जलीय वनस्पतियों और जीवों का दम घुटने लगता है। यह पानी के बहाव को 20 से 40 प्रतिशत तक कम कर देती है। अब यही जलकुंभी हटाना चुनौती बन गया है।
