
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / सूरजकुंड मार्ग स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण दिव्यधाम-श्रीसिद्धदाता आश्रम में चल रहे 19वें ब्रह्मोत्सव समारोह में तीसरे दिन मंगलवार को श्रीसुदर्शन महायज्ञ के उपरांत भगवान श्रीलक्ष्मीनारायण का विवाहोत्सव आयोजित किया गया है। इसमें श्रद्धालुओं ने उत्साह और श्रद्धा के साथ भागीदारी की। विभिन्न पीठों से पधारे आचार्य-संत और श्रद्धालुगण विवाहोत्सव में संगीतमयी भजनों पर जमकर झूमे।
श्रीरामानुज संप्रदाय की तीर्थपीठ हरियाणा एवं इंद्रप्रस्थ पीठ के पीठाधीश्वर अनंत विभूषित श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित किए गए भगवान श्रीलक्ष्मीनारायण के विवाहोत्सव में आश्रम के युवाचार्य स्वामी श्री अनिरूद्धाचार्य जी महाराज, मुख्य पुजारी रमाकांत शास्त्री और दक्षिण भारत से आचार्यों ने भगवान श्रीलक्ष्मीनारायण का मंत्रोच्चर के साथ अभिषेक किया।
विवाहोत्सव में बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ो, शहनाई, नादस्वरम् जैसे वाद्ययंत्रों की ताल पर मधुर स्वरम् भजनों …श्रीमन नारायण-नारायण हरि-हरि, …जय विष्णु भगवान की, …पालनहार-पालनहार पर श्रद्धालुगण नाचते-गाते झूमते रहे। स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीलक्ष्मीनारायण के विवाहोत्सव में शामिल होना सौभाग्य है। इससे निश्चित ही भगवान और माता श्रीजी प्रसन्न होंगी। सभी लोग धर्म मार्ग में चलते रहें, भगवान सदा ही भक्तों के कुशलक्षेम का स्वयं ध्यान रखते हैं। भगवान ने विवाह परंपरा को अपनाकर सनातनी मूल्यों को अपनानो का संदेश दिया है। इस अवसर पर संत समागम में वृंदावन बड़ा खटाला स्थित श्रीवरदराज कुंज के अधिपति श्री श्री 1008 स्वामी स्वामी श्री रामेश्वराचार्य जी महाराज और बिहार आरा से स्वामी समेत संतों ने भी प्रवचन किया। विवाहोत्सव में श्रीसिद्धदाता आश्रम के अधिपति स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने सभी भक्तो को आशीर्वाद और प्रसाद वितरित किया।
भगवान ने किया विवाह के बाद उद्यान विहार नारायण गौशाला में बनाए गए मनमोहन उद्यान में भगवान श्रीलक्ष्मीनारायण ने विहार किया। यहां संगीत की ऐसी बयार बही कि मानों अप्सराएं दिव्य नृत्य कर रही हों। श्रीलक्ष्मी नारायण विवाहोत्सव में भगवान ब्रह्मा, सृष्टि के स्वामी शंभू, महान ऋषि, 12 आदित्य, 11 रूद्र, सिद्ध, गंधर्व, चारण, साध्य, 8 वसु, 49 मारुतगण, विश्ववदेव, दिशाओं के अधिष्ठाता देवता 1र दिगपाल, दो अश्विन, अग्निदेव, चंद्रमा, धर्म, प्रजापति, किन्नर, शेष, देवियां सावित्री, पार्वती, पृथ्वी, सरस्वती, शची, गौरी, शिवा, संज्ञा, ऋद्धि, स्वाहा, रोहिणी, धूमोर्णा, अदिति, मूर्ति, दया, अरुंधती, शांडिली, लोपामुद्रा, अनसूया, गंगा, यमुना, सरस्वती, रेवा, चंद्रभागा, विपाशा, सतलज, देविका, गोदावरी, कावेरी, कौशिकी, कृष्णा आदि का आह्वान किया गया।