
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / 4 अप्रैल 2026 :– मानव रचना एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (MREI) ने संस्थापक डॉ. ओ.पी. भल्ला की स्मृति में फाउंडर्स डे मनाया। इसके साथ ही वार्षिक तकनीकी उत्सव इनोस्किल 2026 का 9वां संस्करण भी आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम संस्थान के 30वें वर्ष की शुरुआत को भी दर्शाता है, जिसके तहत पूरे साल कई पहलें आयोजित की जाएंगी।
फाउंडर्स डे संस्थान के उस मूल विचार को याद करने का अवसर है, जिसमें शिक्षा को केवल कक्षा तक सीमित न रखकर उसे प्रयोग, नवाचार और वास्तविक जीवन से जोड़ा जाता है।
3 और 4 अप्रैल को आयोजित इनोस्किल 2026 में लगभग 4000 छात्रों ने भाग लिया। इसमें मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज़ (MRIIRS), मानव रचना विश्वविद्यालय (MRU), मानव रचना इंटरनेशनल स्कूल्स (MRIS) और 13 अन्य विश्वविद्यालयों और संस्थानों के छात्र शामिल हुए।
कार्यक्रम में प्रतियोगिताएं, प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट प्रस्तुति आयोजित की गईं, जिनका उद्देश्य स्वास्थ्य, जल, स्थिरता, कृषि और ग्रामीण तकनीक से जुड़ी वास्तविक समस्याओं के समाधान ढूंढना था।
उद्घाटन सत्र में एल एंड टी सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज़ के हेड श्री अजेेश कपूर ने उद्योग और शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग की अहमियत पर जोर दिया। वहीं CII हरियाणा के चेयरमैन और बॉनी पॉलिमर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री साकेत भाटिया ने भविष्य के लिए तैयार प्रतिभा बनाने में उद्यमिता और नवाचार की भूमिका पर बात की।
इस अवसर पर मानव रचना एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के प्रेसिडेंट डॉ. प्रशांत भल्ला ने कहा,
“मानव रचना में हमारा मुख्य उद्देश्य बेहतर इंसान बनाना रहा है। समय के साथ हमने ऐसा परिवेश बनाया है जहाँ जिज्ञासा को प्रोत्साहन मिलता है, सीख को आगे बढ़ाया जाता है और छात्र अपने विचारों को साकार कर पाते हैं । फाउंडर्स डे हमें इसी सोच की याद दिलाता है और यह जिम्मेदारी भी कि हम ऐसे लोगों को बनाए जो क्षमता और अच्छे चरित्र के साथ समाज में योगदान दे सकें।”
मानव रचना एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. अमित भल्ला ने कहा,
“आगे हमारा ध्यान इस पर रहेगा कि छात्र सीखने की प्रक्रिया में अधिक सक्रिय रूप से जुड़ें। इसके लिए विभिन्न विषयों को साथ लाना, उद्योग से जुड़ाव मजबूत करना और व्यावहारिक समस्याओं को हल करने के अधिक अवसर देना जरूरी है। हमारा लक्ष्य है कि छात्र अपने विचारों को लागू कर सकें और तेजी से बदलती दुनिया के लिए उपयोगी समाधान विकसित कर सकें।”
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण तकनीकी प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट प्रस्तुति रही, जहां छात्रों ने अपने काम करने वाले मॉडल और प्रोटोटाइप प्रस्तुत किए। इनमें शामिल थे:
• पोर्टेबल ECG डिवाइस, जो हृदय की बुनियादी जांच को अधिक सुलभ बनाने के लिए तैयार किया गया है
• एयरमाउस प्रो, एक टचलेस सिस्टम जिससे आवाज और हाथों के इशारों से कंप्यूटर को नियंत्रित किया जा सकता है।
• फाइटोप्यूरिफायर, पौधों की बायोमास पर आधारित जल शुद्धिकरण प्रणाली।
• हीलकॉर, टिकाऊ निर्माण को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया सीमेंट रहित वॉल प्लास्टर।
• एब्रैसिव जेट मशीनिंग सेटअप, जो मैन्युफैक्चरिंग में उपयोग होने वाली तकनीक को दर्शाता है।
इस फेस्ट में आठ क्षेत्रों—इंजीनियरिंग, बिजनेस और मैनेजमेंट, हेल्थकेयर, स्थिरता, क्यूलिनरी और हॉस्पिटैलिटी, लॉ, मीडिया और साहित्य, तथा डिजाइन—में कुल 39 प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इससे छात्रों को तकनीकी ज्ञान के साथ रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और वास्तविक जीवन के अनुभवों को जोड़ने का अवसर मिला।
प्रस्तुत कई प्रोजेक्ट्स सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) से जुड़े थे, जिनमें स्वच्छ जल और स्वच्छता, अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण, सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा तथा जलवायु कार्रवाई शामिल हैं। इन विचारों में से कई को आगे इनक्यूबेशन और अन्य सहयोग के माध्यम से विकसित किया जाएगा।
तकनीकी प्रदर्शनी का उद्घाटन UNO मिंडा ग्रुप के चेयरमैन और ASSOCHAM के प्रेसिडेंट श्री निर्मल कुमार मिंडा ने किया। उन्होंने छात्रों को जिज्ञासु बने रहने, मौजूदा प्रणालियों पर सवाल उठाने और सहयोग तथा निरंतर सीखने के माध्यम से वास्तविक जरूरतों पर आधारित समाधान बनाने के लिए प्रेरित किया।
इस कार्यक्रम को माइक्रोवर्ल्ड इन्फोसोल, वेदर कम्फर्ट इंजीनियर्स, एनएचपीसी, अपस्किल नेक्सस, थोर नेटवर्क, अनसैडटॉक्स एजुकेशन, डेल टेक्नोलॉजीज़ और UNO मिंडा ने प्रायोजित किया। इन संस्थाओं ने प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन करने और छात्रों के साथ बातचीत में भी भाग लिया।
इस अवसर पर “30 Years to Infinity” नाम से एक विशेष लोगो भी लॉन्च किया गया, जो मानव रचना के 30वें वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। यह यात्रा नवाचार, अकादमिक उत्कृष्टता और उद्योग के साथ सहयोग से आगे बढ़ी है, और पूरे वर्ष कई नई पहलें आयोजित की जाएंगी।