
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / उप वन संरक्षक झलकार उयाके ने जानकारी देते हुए बताया कि माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा पारित आदेश के संदर्भ में यह निर्देश जारी किए गए हैं कि हरियाणा राज्य के गैर-वन क्षेत्रों में वृक्षों की कटाई के विनियमन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश लागू किए जाएं। उन्होंने बताया कि अधिकरण द्वारा निर्देशित किया गया है कि राज्य के गैर-वन क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई को नियंत्रित करने के लिए एक अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है। यह व्यवस्था तब तक प्रभावी रहेगी जब तक राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में विस्तृत कानूनी प्रावधान अधिसूचित नहीं किए जाते।
उन्होंने बताया कि अधिकरण ने कि किसी भी निजी भूमि, सरकारी भूमि, नगर निगम, पंचायत, सार्वजनिक संस्थान, सार्वजनिक उपक्रम या किसी अन्य संस्था की भूमि पर खड़े पेड़ों को बिना अनुमति नहीं काटा जाएगा। पेड़ काटने से पूर्व संबंधित जिले के प्रभागीय वन अधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा, सिवाय उन श्रेणियों के जिन्हें राज्य सरकार द्वारा छूट प्रदान की गई है या भविष्य में प्रदान की जाएगी।
उन्होंने कहा कि आदेश के अनुसार पेड़ों की कटाई की अनुमति हेतु संबंधित प्रभागीय वन अधिकारी को आवेदन करना होगा, जिसमें भूमि का विवरण, स्थान, क्षेत्रफल, स्वामित्व, पेड़ों की संख्या तथा कटाई के कारण का उल्लेख करना आवश्यक होगा। अनुमति प्रदान करते समय प्रत्येक एक पेड़ के बदले कम से कम तीन देशी प्रजाति के पेड़ लगाने की शर्त भी लागू की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति या संस्था बिना अनुमति पेड़ काटती है या प्रतिपूरक वृक्षारोपण की शर्तों का पालन नहीं करती है, तो संबंधित प्रभागीय वन अधिकारी द्वारा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई जाएगी, जिसकी वसूली जिला उपायुक्त के माध्यम से भू-राजस्व बकाया की तरह की जाएगी।
उन्होंने कहा कि उक्त आदेश के अनुपालन में जिला प्रशासन द्वारा नगर निगम, एचएसवीपी, पंचायती राज संस्थाओं, लोक निर्माण विभाग, विकास प्राधिकरणों तथा अन्य सभी सरकारी एवं अर्द्ध-सरकारी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्राधिकार में किसी भी प्रकार की पेड़ कटाई से पूर्व प्रभागीय वन अधिकारी से अनिवार्य रूप से अनुमति प्राप्त करना सुनिश्चित करें। बिना अनुमति पेड़ काटे जाने की स्थिति में संबंधित विभाग या एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
