
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के उपलक्ष्य में आज एक रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के अंतर्गत महिला प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में महिलाओं के योगदान को सम्मानित करना तथा विश्वविद्यालय में लैंगिक समानता और सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता लाना था।
हालाँकि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है, लेकिन विश्वविद्यालय ने अधिकतम छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा अतिथियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए इसे 12 मार्च को आयोजित करने का निर्णय लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत से हुई, इसके बाद जे.सी. बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय, भिवानी की कुलगुरु प्रो. दीप्ति धर्माणी रहीं तथा डी.ए.वी. शताब्दी कॉलेज, फरीदाबाद की प्रधानाचार्या (सेवानिवृत्त) डॉ. सविता भगत सम्मानित अतिथि रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता जे.सी. बोस विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने की।
कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने सभी महिलाओं एवं लड़कियों के लिए पूर्ण अधिकार, न्याय और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के थीम को महत्वपूर्ण बताया और विश्वविद्यालय में महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने विशेष रूप से विश्वविद्यालय की महिला फैकल्टी की समर्पण भावना और कड़ी मेहनत की सराहना की तथा उनके शोध, कौशल उन्नयन और करियर विकास के लिए दी जा रही विशेष सुविधाओं का जिक्र किया। इनमें अकादमिक अवकाश, अन्य सुविधाएँ तथा प्रमुख अकादमिक एवं प्रशासनिक भूमिकाएँ शामिल हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की अनेक छात्राएँ भारती फाउंडेशन की छात्रवृत्तियों का लाभ ले रही हैं, जिससे वे बिना आर्थिक बाधा के उच्च शिक्षा प्राप्त कर पा रही हैं।
डॉ. सविता भगत ने महिलाओं के राष्ट्र-निर्माण में योगदान पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कार्यस्थलों पर पुरुषों और महिलाओं के बीच मौजूद असमानताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाएँ घर और कार्यालय दोनों जगह मल्टी-टास्किंग करती हैं, जिसके कारण उनके कार्य घंटे प्रभावित होते हैं और उत्पादकता कम हो जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सच्ची समानता और कार्यरत महिलाओं के समर्थन के लिए सामाजिक मानसिकता में बदलाव लाना अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य अतिथि प्रो. दीप्ति धर्माणी ने लैंगिक समानता की वकालत करते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय ग्रंथों में पुरुष व महिला को सदैव समान माना गया है। उन्होंने बल दिया कि पुरुष और महिला के बीच प्रतिस्पर्धा नकारात्मक नहीं, बल्कि स्वस्थ और सकारात्मक होनी चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा लैंगिक समानता की दिशा में उठाए गए सक्रिय कदमों की सराहना की और युवा महिलाओं को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न सांस्कृतिक क्लबों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने कार्यक्रम को और आकर्षक बनाया। कार्यक्रम का समापन डॉ. प्रीति सेठी द्वारा प्रस्तुत औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। पूरा कार्यक्रम प्रो. संध्या दीक्षित, चेयरपर्सन, आंतरिक शिकायत समिति तथा उनकी समर्पित टीम द्वारा बेहद व्यवस्थित एवं समन्वित तरीके से आयोजित किया गया। बाद में सम्मानित अतिथियों ने विश्वविद्यालय के अत्याधुनिक स्टूडियो का भ्रमण भी किया।
