
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / महान शिक्षाविद और प्रख्यात साहित्यकार विश्वामित्र सत्यार्थी के साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान को श्रद्धापूर्वक याद में 3सी/ ब्लॉक में आयोजित ‘भजन भावांजलि’ कार्यक्रम में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध आर्य भजनोपदेशक प्रदीप शास्त्री ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों के माध्यम से ईश्वर की सर्वव्यापकता और उनकी महिमा का गुणगान किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पधारीं एमसीएफ महापौर प्रवीण बत्रा जोशी का भव्य स्वागत किया गया। आयोजन के दौरान मंजुला बक्षी और नीरा सत्यार्थी ने महापौर को श्रद्धा के प्रतीक स्वरूप ओउ्म पट्टिका पहनाकर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर महापौर ने कार्यक्रम में प्रस्तुत किए गए मधुर भजनों का आनंद लिया और भक्तिपूर्ण वातावरण की सराहना की।
गुरुकुल इंद्रप्रस्थ के संचालक आचार्य ऋषिपाल ने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं को संस्कारवान बनने की प्रेरणा देते हुए कहा कि अपने माता-पिता के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन करना ही सबसे बड़ी सेवा और धर्म है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिस समाज में बुजुर्गों का सम्मान होता है, वही समाज प्रगति के पथ पर अग्रसर रहता है।
महान शिक्षाविद और प्रख्यात साहित्यकार विश्वामित्र सत्यार्थी के साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। इस अवसर पर आचार्य ऋषिपाल ने आर्य समाज के माध्यम से समाज सुधार और वैदिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार में उनके द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। को भी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। स्वदेश सत्यार्थी पलवल स्थित सरस्वती शिशु मंदिर और फरीदाबाद के राष्ट्रीय बाल निकेतन की संस्थापक प्रधानाचार्या रही स्वदेश सत्यार्थी के शिक्षा के क्षेत्र में उनके समर्पण और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए किए गए उनके प्रयासों को याद करते हुए उन्हें एक कर्मठ और प्रेरणादायी व्यक्तित्व बताया गया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सत्यार्थी दंपती के सामाजिक कार्यों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि समाज सुधार और जनकल्याण के क्षेत्र में सत्यार्थी दंपती का योगदान अनुकरणीय है और अन्य लोगों को भी उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।
भजनोपदेशक ने भजनों के माध्यम से बताया कि ईश्वर निर्विकार है और सृष्टि के कण-कण में व्याप्त है। वह स्वयं दिखाई नहीं देता, लेकिन संसार के प्रत्येक प्राणी के कर्मों का साक्षी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वह सृष्टि रचनाकार सर्वहितकारी है और मनुष्य को सदैव सद्मार्ग पर चलते हुए निष्छल मन से प्रभु की स्तुति करनी चाहिए। सत्कर्मों को ही जीवन का आधार मानकर सर्वहितकारी जीवन यापन करने की महत्ता पर प्रकाश डाला गया।
भजनों के साथ-साथ अपने व्याख्यान में आचार्य प्रदीप शास्त्री ने माता-पिता के महत्व को सर्वोपरि बताया। उन्होंने कहा कि माता-पिता प्रभु तुल्य हैं और उनके उपकारों को कभी नहीं भुलाया जा सकता। परिवार और बच्चों के प्रति उनके निस्वार्थ प्रेम और त्याग को अतुलनीय बताते हुए उन्होंने उपस्थित जनसमूह और युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे अपने माता-पिता की सेवा और सम्मान को अपने जीवन का परम धर्म बनाएं।
कार्यक्रम की सफलता में मुख्य भूमिका निभाते हुए आर्य केंदिय सभा (नगर निगम क्षेत्र) के महासचिव जितेंद्र सरल ने कुशलता पूर्वक मंच संचालन किया, अपने मधुर भजनों की प्रस्तुति दी तथा और उनकी ओजस्वी वाणी ने श्रोताओं को अंत तक बांधे रखा। समारोह के समापन पर वसु मित्र सत्यार्थी ने मुख्य अतिथि महापौर प्रवीण बत्रा जोशी एवं विशिष्ट अतिथि देशबंधु आर्य, आचार्य ऋषिपाल सहित वहां उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया। अपने संबोधन में ईश्वर की सरल हृदय से उपासना करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता की सेवा ही वास्तविक ‘परम धर्म’ है और प्रत्येक व्यक्ति को इसे अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर हरियाणा आर्य प्रतिनिधि सभा के पूर्व अध्यक्ष एवं आर्य केंद्रीय सभा (नगर निगम क्षेत्र) के प्रधान देशबंधु आर्य पार्षद मनोज नासवा तथा विभिन्न आर्य समाजों और अन्य सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने कार्यक्रम में पहुँचकर इसे सफल बनाया।
