
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत 26. फरवरी को राष्ट्रीय मांग दिवस का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी देते हुए अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि राष्ट्रीय मांग दिवस 26, फरवरी को देशभर में सभी सरकारी, अर्धसरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों, नगर निगमों, पालिकाओं, परिषदों और विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन किए जाएंगे और लंबित मांगों के मांग पत्र राज्य के चीफ सेक्रेटरी को भेजे जाएंगे। उन्होंने बताया कि मांग दिवस पर केंद्र एवं राज्य सरकार की कर्मचारी और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ और पुरानी पेंशन बहाली, ठेका कर्मियों को पक्का करने, खाली पदों को स्थाई भर्ती से भर बेरोजगारों को रोजगार देने,निजीकरण पर रोक,लेबर कोड्स, बिजली संशोधन बिल व एनईपी की वापसी , बकाया डीए डीआर के भुगतान व पांच हजार रुपए अंतरिम राहत देने आदि मांगों की प्राप्ति तक निर्णायक आंदोलन चलाने के लिए कर्मचारियों को तैयार किया जाएगा। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री व महासचिव कृष्ण कुमार नैन ने बताया कि 26 फरवरी को हरियाणा में माननीय हाईकोर्ट के फैसले को अक्षरशः लागू करते हुए ठेका कर्मियों को पक्का करने,अलग से वेतन आयोग का गठन, पांच हजार रुपए अंतरिम राहत और अन्य मांगों को लेकर सभी विभागों में प्रदर्शन किए जाएंगे और चीफ सेक्रेटरी को मांग पत्र भिजवाएं जाएंगे।
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि 12 फरवरी की सफल हड़ताल के बावजूद कर्मचारी और मजदूर तथा उनकी मांगे व समस्याएं सरकार के एजेंडे में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों तथा पीएसयू में वर्कलोड व आबादी के अनुसार लगभग एक करोड़ पद रिक्त हैं, लेकिन सरकार इनको स्थाई भर्ती से भर बेरोजगारों को रोजगार देने की बजाय आंशिक तौर पर ठेका कर्मियों को तैनात कर रही है। सभी सांसद और विधायक पुरानी पेंशन स्कीम के तहत पेंशन प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन जनवरी ,2004 से सेवा में आए कर्मचारियों को यह सुविधा नही दी जा रही है। उन्होंने बताया कि जन सेवाओं के विभागों को सुदृढ़ कर जनता को बेहतर जन सेवाएं प्रदान करने की बजाय इनका निजीकरण किया जा रहा है। बिजली संशोधन बिल को चालू बजट सत्र के दूसरे हाफ में पास कर बिजली वितरण प्रणाली को निजी हाथों सौंपने की तैयारी है। जिससे बिजली गरीब व किसान की पहुंच से बाहर हो जाएगी और बिजली पर कारपोरेट घरानों का कब्जा हो जाएगा। इसीलिए ठीक चल रहें मीटरों को बदलकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने चार लेबर कोड्स को मजदूरों की गुलामी का दस्तावेज करार देते हुए वापसी की मांग की। उन्होंने कहा कि लेबर कोड्स के द्वारा यूनियन बनाने, हड़ताल करने और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार पर हमला किया जा रहा है। सरकार स्कीम वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने और 30 हजार रुपए न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग को भी अनसुना किया जा रहा है।
