
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के साहित्य एवं भाषा विभाग, फैकल्टी ऑफ लिबरल आर्ट्स एंड मीडिया स्टडीज द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतर्विषयक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “ट्रांसमीडिया स्टोरीटेलिंग: नैरेटिव्स, डिस्कोर्स एंड डिसेमिनेशन” (टीएस-26) आज प्रेरणादायक समापन समारोह के साथ सफलतापूर्वक समाप्त हुआ।
समापन सत्र ट्रांसमीडिया स्टोरीटेलिंग के माध्यम से समाज के विमर्श को नया रूप देने, हाशिए की आवाजों को सशक्त बनाने, सांस्कृतिक रुझानों को प्रभावित करने तथा डिजिटल युग की कानूनी-नैतिक चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श के साथ संपन्न हुआ। ट्रांसमीडिया कथाएं किताबों, फिल्मों, सोशल मीडिया, वीडियो, पॉडकास्ट और उभरते प्लेटफॉर्म्स पर फैलकर समाज में गहरे बदलाव ला रही हैं।
समारोह की शुरुआत अतिथियों और प्रतिभागियों के सम्मान से हुई। सम्मेलन संयोजक प्रो. दिव्यज्योति सिंह ने सम्मेलन की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें बताया गया कि दो दिनों में हाइब्रिड मोड में 80 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें नैरेटिव स्टडीज, सेमियोटिक्स, शेक्सपियरियन अनुकूलन, जेनरेटिव एआई इन स्टोरीटेलिंग, सबाल्टर्न प्रैक्टिसेज और कन्वर्जेंस कल्चर जैसे विषय शामिल थे। देश-विदेश के विद्वानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने सत्र की अध्यक्षता करते हुए विभाग की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैश्विक सहभागिता वाला यह हाइब्रिड सम्मेलन साहित्य, मीडिया, प्रौद्योगिकी और समाज को जोड़ने वाली नवाचारी शोध के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। कुलसचिव प्रो. अजय रँगा ने सम्मेलन के प्रमुख निष्कर्षों, विशेष रूप से ट्रांसमीडिया स्टोरीटेलिंग के सामाजिक एवं कानूनी आयामों पर पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि प्रो. अक्षय कुमार (अंग्रेजी एवं सांस्कृतिक अध्ययन विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़) ने समकालीन संस्कृति में कथाओं की बदलती भूमिका पर गहन विचार साझा किए। उन्होंने तुलनात्मक भारतीय साहित्य, सांस्कृतिक सिद्धांत और आधुनिक साहित्यिक आलोचना के आधार पर बताया कि ट्रांसमीडिया रूप कैसे स्टोरीटेलिंग को लोकतांत्रिक बनाते हैं और पारंपरिक सत्ता संरचनाओं को चुनौती देते हैं।
डॉ. चंचल भारद्वाज (निदेशक, इंडस्ट्री रिलेशंस एंड एलुमनाई अफेयर्स, श्री विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी, पलवल) ने ट्रांसमीडिया के व्यावहारिक प्रभावों पर बल दिया, विशेषकर स्किल डेवलपमेंट, इंडस्ट्री सहयोग और नवाचारी मीडिया प्रैक्टिस के माध्यम से समाज सशक्तिकरण में। सत्र का समापन संगठन सचिव ममता बंसल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों, प्रायोजकों और आयोजन टीम का आभार व्यक्त किया गया।
दूसरे दिन के प्लेनरी सत्र में दो गहन व्याख्यान हुए, जिसमें डॉ. नीर कंवल मणि ने “द विल एंड द वॉइस” शीर्षक से मिथ और मिथोस की अवधारणा पर प्रकाश डाला। प्रो. गीता बिंदल ने आधुनिक सस्टेनेबिलिटी विमर्श की सीमाओं पर चर्चा की। सम्मेलन के दौरान छात्रों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम, पहले दिन का लोकगायन “झूलना” और फोटो प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण रहे।
