
फरिदाबाद,जनतंत्र टुडे
अग्रवाल महाविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा भारत छोड़ो आन्दोलन-अगस्त क्रांति पर एक डॉक्यूमेंटरी विद्यार्थियों को दिखाई गई व विद्यार्थियों ने इस आंदोलन के महत्त्व व योगदान पर अपने विचार भी प्रकट किए। कार्यक्रम का आयोजन अग्रवाल महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ कृष्ण कांत गुप्ता जी की सद्प्रेरणा से हुआ। डॉक्यूमेंटरी का विषय-“अगस्त क्रांति- इतिहास, महत्त्व व रोचक तथ्य” रहा । इस डॉक्यूमेंटरी को इतिहास विभाग के लगभग 60 छात्र-छात्राओं ने देखा व इससे जुड़े इतिहास के महत्त्वपूर्ण तथ्यों को जाना। सर्वप्रथम अग्रवाल महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ कृष्ण कांत गुप्ता जी ने नए शैक्षणिक सत्र के आरंभ के प्रथम दिन पर विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी और कहा कि 9 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन दिवस मनाया जाता है जिसे ‘अगस्त क्रांति’ भी कहा जाता है। ये आंदोलन भारत का सबसे तीव्र और विशाल आंदोलन था जिसमें सभी लोगों की भागीदारी थी। इसी के चलते अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। प्राचार्य महोदय ने कहा कि 8 अगस्त 1942 को मुंबई अधिवेशन में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का प्रास्ताव पारित हुआ और 9 अगस्त को पूरे देश में ये आंदोलन शुरु हुआ जिसे इतिहास में अगस्त क्रांति के रूप में जाना गया। महात्मा गाधी ने ऐतिहासिक ग्वालिया टैंक मैदान (अब अगस्त क्रांति मैदान) से देश को ‘करो या मरो‘ का
नारा दिया। तत्पश्चा्त इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ जयपाल सिंह ने विद्यार्थियों को अगस्त क्रांति का विस्तारपूर्वक वर्णन दिया। डॉ जयपाल सिंह ने बताया कि जैसे ही इस आंदोलन की शुरूआत हुई, 9 अगस्त 1942 को दिन निकलने से पहले ही कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सभी सदस्य गिरफ्तार हो चुके थे और कांग्रेस को गैरकानूनी संस्था घोषित कर दिया गया था। अंग्रेजों ने गांधी जी को अहमदनगर किले में नजरबंद कर दिया। महात्मा गांधी को नजरबंद किया जाने के
समाचार ने देशभर में हड़ताल और तोड़फ़ोड़ की कार्रवाइयों शुरु हो गई। कहते हैं कि इस आंदोलन में करीब 940 लोग मारे गए थे और 1630 घायल हुए थे जबकि 60229 लोगों ने गिरफ्तारी दी थी।आंदोलन के दौरान पश्चिम में सतारा और पूर्व में मेदिनीपुर जैसे कई जिलों में स्वतंत्र सरकार, प्रतिसरकार की स्थापना कर दी गई थी। ब्रिटिश सरकार ने इस आंदोलन के प्रति काफी सख्त रुख अपनाया फिर भी इस विद्रोह को दबाने में ब्रिटिश सरकार को सालभर से ज्यादा समय लग गया।इस आंदोलन ने 1943 के अंत तक भारत को संगठित कर दिया था। सभी धर्म और जाति के लोग एक साथ अंग्रेजों के विरुद्ध खड़े हो गए थे। 1943 में ही 10 फरवरी को महात्मा गांधी ने 21 दिन का उपवास शुरू किया था। उपवास के 13वें दिन गांधी जी हालत बेहद खराब होने लगी थी। अंग्रेजों द्वारा देश को स्वतंत्र किए जाने के संकेत के चलते गांधीजी ने आंदोलन को बंद कर दिया और अंग्रेजों ने कांग्रेसी नेताओं सहित लगभग 100,000 राजनैतिक बंदियों को रिहा कर दिया। बी.ए. तृतीय वर्ष की छात्रा क्षमा मित्तल और योगिता ने अगस्त क्रांति के महत्त्व पर कविता सुनाई व छात्रों ने अगस्त क्रांति का इतिहास में योगदान विषय पर अपने विचार भी प्रकट किए । अंत में विद्यार्थियों ने दो मिनट का मौन रख शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इतिहास विभाग की डॉ सुप्रिया ढांडा ने सभी का धन्यवाद किया।
