
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / थैलेसिमिया ग्रस्त बच्चे पहले ही मौत से लड़ रहे है सुरक्षित रक्त न मिलने के कारण अब उनको एक और जानलेवा खतरे का सामना करना पड़ रहा है। झारखंड में असुरक्षित रक्त आधान के कारण थेलासीमिया ग्रस्त 6 बच्चों, हरियाणा में २ बच्चो व् मध्य प्रदेश 5 बच्चो के एच.आई.वी. संक्रमित होने की त्रासदी। यह तो तब जब कुछ ही बच्चो का HIV टेस्ट किया गया तो पता चला है अगर ठीक से सभी बच्चो का टेस्ट किया जाये तो बहुत से HIV के मामले सामने आ सकते है।
फाउंडेशन अगेंस्ट थैलासीमिया, हरियाणा झारखंड, हरियाणा व् मध्य्प्रदेश में हाल ही में हुई त्रासदी पर गहरा दुःख और चिंता व्यक्त करता है, जहाँ कई थैलेसीमिया रोगियों के दूषित रक्त आधान के कारण एचआईवी संक्रमण होने की सूचना है। बात सिर्फ एक बच्चे तक ही नहीं रह जाती उस बच्चे का पूरा परिवार पहले ही थेलासीमिया के कारण सदमे में रह रहा होता है उस परिवार को एक और सदमे का सामना करना पड़ता है यह सिर्फ जिस पर बितती उसका अंदाज़ा वो ही लगा सकता है।
एसोसिएशन भविष्य में रक्त आधान के माध्यम से एचआईवी संक्रमण को रोकने के लिए न्यूक्लिक एसिड परीक्षण (NAT) के तत्काल कार्यान्वयन, नीतिगत सुधार और मजबूत निगरानी तंत्र की मांग सरकार से करता है।
थैलेसिमिया ग्रस्त बच्चे पहले ही मौत से लड़ रहे है अगर सुरक्षित रक्त न मिला तो उनको एक और जानलेवा खतरे का सामना करना पड़ेगा
यह हृदयविदारक घटना भारत की रक्त सुरक्षा व्यवस्था में व्याप्त खामियों को उजागर करती है और एक सशक्त ‘चेतावनी’ का काम करती है। यह एक गंभीर प्रश्न उठाती है: हरियाणा सहित देश भर के केंद्रों में इंडिविजुअल डोनर न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग (ID-NAT) जैसी उन्नत परीक्षण तकनीकें उपलब्ध होने के बावजूद, आज भी रक्त आधान के माध्यम से एचआईवी संक्रमण क्यों हो रहा है?
देश में अभी तक NAT परीक्षण आवश्यक क्यों लागू नहीं किया गया?
देश में लगभग 120000 थैलेसीमिया रोगी हैं, जिन्हें हर साल कुल मिलाकर 2400000 यूनिट्स से ज़्यादा रक्त आधान की आवश्यकता होती है। NAT एक विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त, उन्नत जाँच पद्धति है, जो एचआईवी, हेपेटाइटिस बी (एचबीवी) और हेपेटाइटिस सी (एचसीवी) जैसे संक्रमणों का पारंपरिक जाँच विधियों की तुलना में बहुत पहले पता लगा सकती है।
मौत का मौत से सामना
थैलासीमिया जन्मजात एक आनुवंशिक बीमारी है। जो किसी दवा या इंजेक्शन से ठीक नहीं हो पाती, बस लगातार जीवन भर बच्चे को रक्त व् दवाओं पर ही निर्भर रहना पड़ता है। हाँ कुछ मामलो में बच्चा ठीक हो सकता है वो है अस्थिमाँजा प्रत्यारोपण, पहली बात तो बच्चे का अस्थिमाँजा का मिलान होना दूसरा बहुत ही महंगा उसके बाद अस्थिमाँजा प्रत्यारोपण का सफल होना।
थैलासीमिया से पीड़ित बच्चे के टेस्टो का होना बहुत ही जरुरी होता है क्यु की इन बच्चो को लगतार रक्त चढ़ाया जाता है जिस कारण उनको रक्त संबंधी अन्य बीमारियां घेर लेती है अगर समय रहते पता चल जाये तो बच्चे को मुश्किल हालत में जाने से रोका जा सकता है। लगातार रक्त चढ़ाने से हेपेटाइटिस बी सी, एच आई वी का होना एक आम बात है। साथ ही अन्य बहुत सारे टेस्ट भी है जिनका समय समय पर होना अति आवश्यक होता है। बच्चे को स्वस्थ रखने के लिए उनके टेस्ट होना जरुरी होता है। सिर्फ रक्त चढ़वाने से बच्चो को स्वस्थ नहीं रखा जा सकता है उनके टेस्ट होना अति आवश्यक होता है टेस्टो की रिपोर्ट पर ही डॉक्टर उचित दवाइयाँ लिख कर बच्चो को उचित सलाह दे कर उनको स्वस्थ जीने का मंत्र दे सकते है।
