
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / के. एल. मेहता दयानंद कॉलेज फॉर विमेन, के विज्ञान विभाग, द्वारा कॉलेज ऑडिटोरियम में “Unlocking the Power of Research: What It Is and Why It Matters” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का आयोजन डॉ. आनंद मेहता, अध्यक्ष, एमडीईएस के संरक्षण में किया गया। संगोष्ठी के संसाधन व्यक्तियों के रूप में प्रो. (डॉ.) ज्योत्सना पंडित, डीन, स्कूल ऑफ साइंसेज़, मानव रचना विश्वविद्यालय, फरीदाबाद तथा प्रो. (डॉ.) अर्पित सैंड, विभागाध्यक्ष एवं प्रोग्राम हेड (रसायन विज्ञान), विज्ञान विभाग, मानव रचना विश्वविद्यालय, फरीदाबाद उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जो ज्ञान एवं प्रबोधन के प्रतीक के रूप में किया गया।
प्राचार्या डॉ. मीनू दुआ ने संसाधन व्यक्तियों एवं गणमान्य अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया।
डॉ. संध्या खेरा, प्राचार्या, रामानुजन कॉलेज, पलवल ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
संगोष्ठी की संयोजिका डॉ. बीना सेठी ने विषय का परिचय देते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के संदर्भ में शोध के महत्व पर प्रकाश डाला तथा छात्रों और शिक्षकों में शोध अभिरुचि विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रथम तकनीकी सत्र प्रो. (डॉ.) अर्पित सैंड द्वारा संचालित किया गया। उन्होंने शोध की प्रमुख अवधारणाओं पर व्याख्यान दिया, जिसमें शोध दृष्टिकोण एवं परिकल्पना निर्माण, शोध अभिकल्प (रिसर्च डिज़ाइन) तथा नमूना चयन तकनीकों पर विशेष रूप से चर्चा की। उनका सत्र अकादमिक परिप्रेक्ष्य में शोध प्रक्रिया को समझने हेतु अत्यंत उपयोगी रहा।
द्वितीय सत्र प्रो. (डॉ.) ज्योत्सना पंडित द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने शोध कौशल के विकास, समस्या-समाधान तकनीकों तथा शोध में नैतिकता की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उनका व्याख्यान विद्यार्थियों एवं शिक्षकों दोनों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा।
प्राचार्या डॉ. मीनू दुआ ने विज्ञान विभाग द्वारा संगोष्ठी के सफल आयोजन हेतु सराहना व्यक्त की तथा वर्तमान शैक्षणिक परिवेश में शोध-आधारित शिक्षा की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने प्रतिभागियों के अकादमिक अनुभव को समृद्ध करने में संसाधन व्यक्तियों के महत्वपूर्ण योगदान की भी प्रशंसा की।
संगोष्ठी में शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं शोधार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। विभिन्न महाविद्यालयों से कुल 198 प्रतिनिधियों ने हाइब्रिड मोड के माध्यम से संगोष्ठी में भाग लिया। प्रश्नोत्तर सत्र अत्यंत संवादात्मक रहा, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने प्रश्नों का समाधान प्राप्त किया और संसाधन व्यक्तियों के साथ सार्थक अकादमिक चर्चा की। संगोष्ठी का समन्वय डॉ. अन्नू कालरा एवं डॉ. पूर्णिमा वर्मा द्वारा सह-संयोजक के रूप में किया गया।
कार्यक्रम का समापन सुश्री रुचि भारद्वाज, सहायक प्राध्यापक, जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ, जिससे यह विचारोत्तेजक एवं अकादमिक रूप से समृद्ध राष्ट्रीय संगोष्ठी सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
