
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के चिकित्सकों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। मंगलवार को अस्पताल प्रबंधन और हड़ताली चिकित्सकों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही। चिकित्सकों की हड़ताल से ओपीडी के मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श के लिए तीन से चार घंटे का इंतजार करना पड़ा। इसके अलावा रेग्युलर ड्यूटी वाले डॉक्टर नहीं होने से कई मरीज बिना उपचार के लिए ही वापस लौट गए। रहा था। वहीं कई मरीज स्थायी चिकित्सक नहीं मिलने से वापस भी लौट गए।
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की प्रतिदिन की ओपीडी साढ़े तीन से चार हजार मरीज तक की रहती है। सोमवार को एकदम से 400 चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाने से आंशिक प्रभाव पड़ा था। वहीं मंगलवार को यह प्रभाव और अधिक हो गया। इनमें पीजी के छात्र के अलावा एमएस, एमडी वाले डॉक्टर भी शामिल हैं। चिकित्सकों और अस्पताल प्रबंधन के बीच कोई समझौता नहीं होने पर आने वाले दिनों में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सुविधाएं और भी प्रभावित हो सकती है।
चिकित्सक अस्पताल प्रबंधन से दुर्व्यवहार पर माफी और मेडिकल कवरेज की मांग अड़े हुए हैं। चिकित्सकों का कहना है कि अभी तक अस्पताल प्रबंधन का कोई भी प्रतिनिधि उस चिकित्सक से मिलने नहीं आया है, जिसके साथ उच्च अधिकारियों ने दुर्व्यवहार किया था। इसके अलावा केवल आपात स्थिति में ही चिकित्सकीय सेवाएं देने को सहमत है, जबकि चिकित्सक पूर्ण रूप से चिकित्सकीय सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। उनका कहना था कि प्रबंधन अब अपने उच्च अधिकारियों से बात करेगा,
बीके अस्पताल के चिकित्सकों को ईएसआईसी मे लगाया गया
हड़ताली चिकित्सकों और ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल प्रबंधन के बीच आम सहमति नहीं बनने पर हड़ताल अभी कुछ दिन और जारी रह सकती है। इसे देखते हुए चंडीगढ़ स्वास्थ्य निदेशालय के आदेश पर मंगलवार को बीके अस्पताल के चिकित्सकों को ईएसआईसी में लगाया गया है। इसके तहत सामान्य रोग विशेषज्ञ डॉ. योगेश गुप्ता, न्यूरो सर्जन डॉ. उपेंद्र भारद्वाज और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक वार्ष्णेय ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकीय सेवा देने के पहुंचे। चिकित्सकों को ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में शिफ्ट किए जाने से बीके अस्पताल की भी ओपीडी सेवाएं बाधित होने का खतरा मंडराने लगा है।
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में फरीदाबाद के अलावा दिल्ली एनसीआर के जिलों के मरीज भी उपचार के लिए आते हैं। चिकित्सकों के ओपीडी में नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मरीज अपने चिकित्सकों को ढूंढते रहें। ओपीडी में चिकित्सकों की कमी की वजह से मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा। इससे मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श मिला, लेकिन दवा नहीं मिली। चार बजे के बाद मरीजों को बिना दवा के वापस लौटा दिया गया। मरीजों को बुधवार को आने के लिए बोला गया।
