
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / कुमाऊँ सांस्कृतिक एवं कल्याण संघ द्वारा आयोजित 8वां उत्तरायणी कौतिक रविवार को बेहद भव्यता और पारंपरिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन ने औद्योगिक नगरी फरीदाबाद को उत्तराखंड की सुरम्य वादियों और समृद्ध लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां : कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध लोक गायिका माया उपाध्याय रहीं। उनकी सुरीली आवाज और लोकप्रिय गीतों ने उपस्थित जनसमूह को झूमने पर मजबूर कर दिया। उनके साथ कलाकार प्रकाश आर्या ने भी अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधा। विशेष आकर्षण कुमाऊँ संघ के नन्हे बाल कलाकारों और सदस्यों द्वारा प्रस्तुत लोक नृत्य रहे, जिनमें पहाड़ की पारंपरिक झलक और संस्कार स्पष्ट रूप से दिखाई दिए। उत्तरायणी समारोह में पारंपरिक प्रसाद के रूप में खिचड़ी का वितरण किया गया, जिसमें लगभग 10,000 श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
भारी जन-भागीदारी और मंच का कुशल संचालन नीरज बवाड़ी द्वारा किया गया। उनकी ऊर्जावान शैली और जबरदस्त संबोधन ने दर्शकों का उत्साह अंत तक बनाए रखा। मेले में फरीदाबाद के कोने-कोने से आए लगभग 10,000 से अधिक लोगों की उपस्थिति ने इसे एक ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
संस्था के प्रधान का संदेश संस्था के प्रधान भुवन पंत ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा:-
“उत्तरायणी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। आज जब हम अपनी जड़ों से दूर हो रहे हैं, तब ऐसे आयोजन हमें अपनी ‘पहाड़ी’ पहचान से जोड़ते हैं। हमारा लक्ष्य अपनी लोक परंपराओं को आधुनिकता के बीच भी जीवित रखना है।”
भुवन पंत ने विशेष रूप से बताया कि इस भव्य आयोजन की तैयारियां पिछले दो महीनों से कुमाऊँ मंदिर (ए-ब्लॉक, एसजीएम नगर) में चल रही थीं। उल्लेखनीय है कि यह मंदिर संस्था के सदस्यों द्वारा अपने निजी सहयोग और चंदे से निर्मित किया गया है। कुमाऊँ संघ के सभी पारंपरिक त्योहार इसी मंदिर परिसर में पूरी रीति-रिवाज के साथ मनाए जाते हैं, ताकि नई पीढ़ी अपनी समृद्ध संस्कृति से जुड़ी रहे।
भुवन पंत ने युवाओ को सम्बोधित करते हुए कहा की महानगरों की चकाचौंध में अपनी पहचान मत खोना, याद रखना कि हमारी जड़ें आज भी पहाड़ की मिट्टी और पहाड़ी परंपराओं में बसी हैं। पहाड़ की ‘याद’ और ‘संस्कार’ कभी कम नहीं होने चाहिए। उत्तरायणी के पावन अवसर पर आयोजित होने वाला यह ‘कौतिक’ (मेला) न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यह हमारी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी है।
इस भव्य कार्यक्रम में कई जानी-मानी हस्तियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई, जिससे संस्था से जुड़े सभी सदस्यों का मनोबल और अधिक बढ़ा।
