
फरीदाबाद , जनतंत्र टुडे / जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए के रसायन विज्ञान विभाग द्वारा अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के प्रायोजन में “युवा एवं वैज्ञानिक भविष्य : समृद्ध भारत की ओर” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य युवा इनोवेटर्स को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों तथा प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया और ज्ञान-आधारित भविष्य के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर गहन चर्चा की।
कार्यशाला में स्किल विश्वकर्मा यूनिवर्सिटी सीनियर सेकेंडरी स्कूल तथा स्वामी विवेकानंद सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पलवल के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और वैज्ञानिक चिंतन एवं नवाचार के प्रति जानकारी हासिल की।
कार्यक्रम का शुभारंभ डीन (इंस्टीटूशन) प्रो. मुनीश वशिष्ठ ने किया। उन्होंने वैज्ञानिक प्रगति में गहन अवलोकन के महत्व पर प्रकाश डाला तथा आर्किमिडीज सिद्धांत का उदाहरण देकर बताया कि साधारण अवलोकन भी महान खोजों का आधार बन सकते हैं। उन्होंने युवाओं से अनुशासित, सजग और सामाजिक दायित्वपूर्ण शिक्षार्थी बनने का आह्वान किया।
संचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. पवन सिंह ने “युवा और विकसित भारत 2047” पर अपने विचार व्यक्त करते हुए युवा मन की निर्णायक भूमिका पर बल दिया। उन्होंने संकल्प, साहस, मेक-इन-इंडिया तथा राष्ट्र-निर्माण के लिए बड़े सपने देखने पर जोर दिया।
विज्ञान संकाय की डीन प्रो. अनुराधा शर्मा ने विज्ञान की सामाजिक भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि वैज्ञानिक प्रयासों को हमेशा सामाजिक आवश्यकताओं और राष्ट्रीय विकास के साथ संरेखित रखना चाहिए। उन्होंने ऊर्जा, सहयोग, समर्पण और लक्ष्य-केन्द्रित कार्य की अपील की।
शोध एवं केन्द्रीय उपकरण प्रयोगशाला की निदेशक प्रो. मनीषा गर्ग ने प्रयोग करते समय जिज्ञासा और इच्छाशक्ति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने सीमित संसाधनों में भी समाधान खोजने तथा सर सी.वी. रमन के वैज्ञानिक सफर से प्रेरणा लेने की सलाह दी।
कार्यशाला में अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की कोर रिसर्च अनुदान परियोजना के प्रधान अन्वेषक तथा केन्द्रीय उपकरण प्रयोगशाला के उप-निदेशक डॉ. अनुराग प्रकाश सुंडा ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की उन्नत शोध सुविधाओं का प्रत्यक्ष अनुभव और लाइव प्रदर्शन के माध्यम से जानकारी प्रदान की।
कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने इस पहल की सराहना करते हुए विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। कुलसचिव प्रो. डॉ. अजय रँगा ने कहा कि ऐसे मंच विद्यार्थियों की क्षमता को राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रसायन विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. रवि कुमार ने विभाग की युवा मन में वैज्ञानिक स्वभाव जागृत करने की प्रतिबद्धता दोहराई तथा सभी वक्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
